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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 365, कुल 760 में से

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पृष्ठ 365

स्त्रीपुंससमायोगाध्यायः ३३७
पुरुषो नरः स्त्रिया योषित ऋतुसमये गर्भाधानसमये कथञ्चित् कथमपि नखदशनविक्षतानि
न कुर्यात् कारयेत्। अपिशब्दश्चार्थे। ऋतू रजः। दश षट् च षोडशवासराणि षोडशदिनानि
भवन्ति। तत्र ऋतौ सति प्रथममादौ निशात्रितयं रात्रित्रितयं न गम्यम्। यतस्तत्र गर्भः स्रव-
तीति।।६।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतावन्तःपुरचिन्तायां
स्त्रीपुंससमायोगो नामाष्टसप्ततितमोऽध्यायः ॥७८॥
बृ० भ० द्वि०-२२
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA