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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 760 में से

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पृष्ठ 353

गन्धयुक्त्यध्यायः ३२५
पुनरपि विशेषमाह—
पत्राधिकं निशि हितं सफलं दिवा च
प्रोक्तान्यथाकरणमस्य विडम्बनैव ।
कक्कोलपूगलवलीफलपारिजातै-
रामोदितं मदमुदा मुदितं करोति ॥३७॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां गन्धयुक्ति-
र्नाम सप्तसप्ततितमोऽध्यायः ॥७७॥
रात में पान खाना हो तो पत्ता और दिन में खाना हो तो सुपारी अधिक डालकर
खाना अच्छा होता है, इससे उलटा ( रात में सुपारी और दिन में पत्ता अधिक डालकर )
खाने से केवल उपहास होता है। कक्कोल, सुपारी, लवलीफल ( लवङ्गपुष्प—लवङ्ग
में फूल नहीं होता; अतः फूल के स्थान पर फल का ग्रहण करना चाहिये ) और जाती-
फल से युत पान खाने से मनुष्य को मद के हर्ष से प्रसन्नता की प्राप्ति होती है॥३७॥
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां गन्धयुक्त्यध्यायः सप्तसप्ततितमः ॥७७॥
निशि रात्रौ ताम्बूलं पत्राधिकं हितम्। दिवा च दिवसे सफलं पूगफलाधिकम्। अस्य
ताम्बूलस्य प्रोक्तान्यथाकरणमुक्ताद्विपरीतकरणम्। यथा निशि फलाधिकं दिवसे पत्राधिकं
विडम्बनैषोपहासः। कक्कोलं प्रसिद्धम्। पूगफलानि प्रसिद्धानि। लवलीफलं लवङ्गपुष्पम्,
तस्य फलासम्भवात्। पारिजातं जातीफलम्। एतैरामोदितं युक्तं ताम्बूलं मदमुदा मदहर्षेण
मुदितं हृष्टं नरं करोति॥३७॥
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतावन्तःपुरचिन्तायां
गन्धयुक्तिर्नाम सप्तसप्ततितमोऽध्यायः ॥७७॥
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