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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 306, कुल 760 में से

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पृष्ठ 306

अथ वस्त्रच्छेदलक्षणाध्यायः
अथ वस्त्रच्छेदलक्षणं व्याख्यायते। तत्रादावेवाश्विन्यादीनां नक्षत्राणामभिनववस्त्रोपभोगे
फलमाह—
प्रभूतवस्त्रदाश्विनी भरण्यथापहारिणी ।
प्रदह्यतेऽग्निदैवते प्रजेश्वरेऽर्थसिद्धयः ॥१॥
मृगे तु मूषकाद्भयं व्यसुत्वमेव शाङ्करे ।
पुनर्वसौ शुभागमस्तदग्रभे धनैर्युतिः ॥२॥
भुजङ्गभे विलुप्यते मघासु मृत्युमादिशेत् ।
भगाह्वये नृपाद्भयं धनागमाय चोत्तरा ॥३॥
करेण कर्मसिद्धयः शुभागमस्तु चित्रया ।
शुभं च भोज्यमानिले द्विदैवते जनप्रियः ॥४॥
सुहृद्युतिश्च मित्रभे तदग्रभेऽम्बरक्षयः ।
जलप्लुतिश्च नैर्ऋते रुजो जलाधिदैवते ॥५॥
मिष्टमन्नमपि वैश्वदैवते वैष्णवे भवति नेत्ररोगता ।
धान्यलब्धिरपि वासवे विदुर्वारुणे विषकृतं महद्भयम् ॥६॥
भद्रपदासु भयं सलिलोत्थं तत्परतश्च भवेत् सुतलब्धिः ।
रत्नयुतिं कथयन्ति च पौष्णे योऽभिनवाम्बरमिच्छति भोक्तुम् ॥७॥
यदि अश्विनी नक्षत्र में नवीन वस्त्र धारण करे तो बहुत वस्त्र का लाभ, भरणी में
वस्त्रों की हानि, कृत्तिका में अग्नि से वस्त्र का जलन, रोहिणी में धन-प्राप्ति, मृगशिरा में
वस्त्र को चूहे का भय, आर्द्रा में मृत्यु, पुनर्वसु में शुभ की प्राप्ति, पुष्य में धन का लाभ,
आश्लेषा में वस्त्रनाश, मघा में मृत्यु, पूर्वफाल्गुनी में राजा से भय, उत्तरफाल्गुनी में धन
का लाभ, हस्त में कर्मों की सिद्धि, चित्रा में शुभ की प्राप्ति, स्वाती में उत्तम भोजन का
लाभ, विशाखा में जनों का प्रिय, अनुराधा में मित्रों का समागम, ज्येष्ठा में वस्त्र का
क्षय, मूल में जल में डूबने का भय, पूर्वाषाढा में रोग, उत्तराषाढा में मिष्टान्न का लाभ,
श्रवण में नेत्ररोग, धनिष्ठा में अन्न का लाभ, शतभिषा में विष का अधिक भय, पूर्व
भाद्रपद में जल का भय, उत्तरभाद्रपद में पुत्र का लाभ और रेवती नक्षत्र में नवीन वस्त्र
धरण करे तो रत्नलाभ होता है।।१-७।।
प्रभूतवस्त्रदाश्विनीति । अश्विनीनक्षत्रे यदभिनवं वस्त्रमुपभुज्यते, तदा साऽश्विनी प्रभूत-
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