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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 303, कुल 760 में से

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पृष्ठ 303

कन्यालक्षणाध्यायः २७५
श्मश्रुयुक्ता च या कन्या याऽतिदीर्घा मलावृता।
दासीभावमवाप्नोति देहदोषेण साऽङ्गना।। इति।।२०।।
अथ स्तनकर्णदन्तलक्षणमाह—
स्तनौ सरोमौ मलिनोल्बणौ च
क्लेशं दधाते विषमौ च कर्णौ।
स्थूलाः कराला विषमाश्च दन्ताः
क्लेशाय चौर्याय च कृष्णमांसाः ।।२१।।
जिस स्त्री के स्तन और कान रोमयुक्त, मलिन, अभद्र और छोटे-बड़े हों, वह
क्लेश भोगने वाली होती है तथा जिसके मोटे, बाहर निकले, विषम और काले मांस से
युक्त दाँत हों, वह चोर होती है।।२१।।
स्तनौ सरोमौ रोमसंयुक्तौ मलिनौ कृष्णवर्णावुल्बणौ विषमावतुत्यौ क्लेशं कृच्छ्रं
दधाते दधतः। तथा च—
रोमयुक्तौ स्तनौ यस्या मलिनौ च शिराततौ।
दुःखिता सा भवेन्नारी नित्यं प्रव्रजिता तथा।।
एवंविधौ च कर्णौ सरोमौ मलिनावुल्बणौ विषमावतुत्यौ च क्लेशमेव दधाते।
तथा च—
शिरायुक्तौ न च समौ कर्णौ दारिद्र्यभाजनौ।
स्थूलाः कराला इति। दन्ता रदाः स्थूला अतिविस्तीर्णाः कराला विकराला बहिर्ग-
ताश्च विषमा अतुत्याः क्लेशाय भवन्ति। कृष्णमांसाश्च दन्ताश्चौर्याय भवन्ति। सा स्त्री
चौरी भवतीत्यर्थः। तथा च—
स्थूलाः कराला विषमाः कृष्णमांसा बहिर्गताः।
दन्ता दुःखप्रदा ज्ञेया वैधव्यायासकारिणः।। इति।।२१।।
अथ हस्तलक्षणमाह—
क्रव्यादरूपैर्वृककाककङ्कूसरीसृपोलूकसमानचिह्नैः ।
शुष्कैः शिरालैर्विषमैश्च हस्तैर्भवन्ति नार्यः सुखवित्तहीनाः ।।२२।।
जिस स्त्री के हाथ में मांस खाने वाले (गीध आदि) पक्षी, भेड़िया, कौवा, कंक,
सर्प या उल्लू के समान रेखा हो अथवा सूखे, नाड़ियों से व्याप्त और छोटे-बड़े हाथ
हों, वह स्त्री सुख और धन से हीन होती है।।२२।।
हस्तैः करैः क्रव्यादरूपैश्चिह्नैश्चिह्नितैः क्रव्यादा मांसाशिनो विहगा गृध्रादयः। वृकः
प्राणी। काककङ्कौ प्रसिद्धौ पक्षिणौ। सरीसृपाः प्राणिनः कीटाः। उलूकः पक्षी। तत्समा-
नैस्तत्सदृशैश्चिह्नैः शुष्कैर्निर्मासैः शिरालैः शिरासन्ततैर्विषमैरसमैश्च नार्यः स्त्रियः सुखवित्तहीनाः