बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३० बृहत्संहिता
यच्च हसितमकम्पं कम्परहितं तच्छुभदं प्रशस्तम्। शरीरस्य कम्पश्चलनमवयवानां
येन नोत्पद्यते। सनिमीलितलोचनमतिसङ्कुचितनयनं हसितं पापस्य पापकर्मणः। असकृत्
पुनः पुनर्दुष्टस्य सदोषस्य हसितम्। प्रान्ते हसनान्तेऽसकृद्धसितं सोन्मादस्योन्मादयुक्तस्य
भवति। तथा च—
हसितं कम्परहितं नृपाणामन्यथाऽशुभम्।
असकृद्दोषयुक्तस्य मीलिताक्षस्य चाशुभम्।। इति।।७४।।
अथ ललाटरेखालक्षणमाह—
तिस्रो रेखाः शतजीविनां ललाटायताः स्थिता यदि ताः।
चतसृभिरवनीशत्वं नवतिश्वायुः सपञ्चाब्दा ।।७५।।
विच्छिन्नाभिश्चागम्यगामिनो नवतिरप्यरेखेण।
केशान्तोपगताभी रेखाभिरशीतिवर्षायुः ।।७६।।
पञ्चभिरायुः सप्ततिरेकाग्रावस्थिताभिरपि षष्टिः।
बहुरेखेण शतार्धं चत्वारिंशच्च वक्राभिः ।।७७।।
भ्रूलग्नाभिस्त्रिंशद्विंशतिकश्चैव वामवक्राभिः।
क्षुद्राभिः स्वल्पायुर्न्यूनाभिश्चान्तरे कल्प्यम् ।।७८।।
ललाट में तीन रेखा वाले पुरुष सौ वर्ष जीवित रहते हैं एवं चार रेखा वाले राजा
होते हैं और पञ्चानवे वर्ष तक जीवित रहते हैं। ललाट में टूटी हुई रेखा वाले अगम्या
स्त्री में गमन करने वाले और नब्बे वर्ष जीवित रहने वाले होते हैं, रेखाओं से रहित
ललाट वाले नब्बे वर्ष जीते हैं तथा केशान्त तक रेखा वाले अस्सी वर्ष जीते हैं। पाँच
रेखायुत ललाट वाले सत्तर वर्ष जीते हैं, ललाट में स्थित समस्त रेखाओं के अग्रभाग
मिलें हो तो साठ वर्ष की आयु होती है। छः, सात आदि बहुत रेखाओं से युत ललाट
वाले पचास वर्ष जीते हैं। यदि ललाट में टेढ़ी रेखा हो तो चालीस वर्ष की आयु होती
है। यदि ललाट में भ्रू से लगी रेखा हो तो तीस वर्ष की आयु होती है। यदि ललाट के
वाम भाग में टेढ़ी रेखा हो तो बीस वर्ष की आयु होती है। छोटी रेखा हो तो वह व्यक्ति
बीस वर्ष से भी कम अवधि तक ही जीवित रहता है। यदि न्यून ( एक या दो ) रेखा
से युत ललाट हो तो भी बीस वर्ष से कम आयु होती है। बीच में अपनी बुद्धि से आयु
की कल्पना करनी चाहिये। जैसे तीन रेखा वाले सौ वर्ष और चार रेखा वाले पञ्चानबे
वर्ष जीवित रहते हैं; अतः साढ़े तीन रेखा वाले साढ़े सत्तानवे वर्ष जीवित रहेंगे। इसी
प्रकार अन्यत्र भी हिसाब लगा कर आयु का निश्चय करना चाहिये।।७५-७८।।
तिस्रो रेखा इति। ललाटे मुखपृष्ठे आयता दीर्घाः स्थिता रेखास्तिस्रः। शतजीविनां
शतायुषां भवन्ति। चतसृभिर्ललाटायतरेखाभिरवनीशत्वं राज्यं भवति। नवतिः सपञ्चाब्दा
पञ्चभिर्वर्षैर्युक्ता नवतिरायुर्जीवितं भवति।
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