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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

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पृष्ठ 256

२२८ बृहत्संहिता
दीर्घासंसक्ताभिर्धनिनः खण्डाभिरर्थपरिहीनाः ।
मध्यविनतभ्रुवो ये ते सक्ताः स्त्रीष्वगम्यासु ॥६९॥
मध्य में ऊँची भ्रू वाले पुरुष अल्पायु, बड़ी और ऊँची भ्रू वाले अतिसुखी, विषम
( एक में बड़ी तथा एक में छोटी ) भ्रू वाले निर्धन, बाल चन्द्र की तरह झुकी हुई भ्रू
वाले धनवान, लम्बी तथा परस्पर विना मिली भ्रू वाले धनी, टूटी हुई भ्रू वाले निर्धन
तथा मध्य में नत भ्रू वाले मनुष्य अगम्या स्त्री में गमन करने वाले होते हैं॥६८-६९॥
अभ्युन्नताभिरभिमुख्येनोच्चाभिर्भ्रूर्भिरल्पायुषः स्वल्पजीविनो भवन्ति। विशालाभिर्विस्ती-
र्णाभिरुन्नताभिरुच्चाभिरतिसुखिनो भवन्ति। ये सर्वे विषमभ्रुवोऽतुल्यभ्रुवस्ते दरिद्रा निर्धना
भवन्ति। बालेन्दुसदृश्यो बालचन्द्रतुल्या नता भ्रुवो येषां ते सधनाः।
दीर्घाश्च ता असंसक्ता दीर्घासंसक्तास्ताभिर्दीर्घासंसक्ताभिर्भ्रूर्भिर्धनिनो भवन्ति; खण्डाभि-
रर्थपरिहीना दरिद्रा भवन्ति। ये मनुष्या मध्यविनतभ्रुवो मध्याद् विनता अस्पृष्टा भ्रुवो येषां
ते अगम्यासु स्त्रीषु सक्ता निरता भवन्ति। तथा च—
अभ्युन्नताभिः स्वल्पायुर्विशालाभिः सुखान्विताः।
मध्योन्नतभ्रुवो ये च पापसक्ताश्च ते नराः॥
बालेन्दुभ्रूसमाश्चाढ्या दरिद्रा विषमभ्रुवः।
असंलग्नभ्रुवो ये तु धनिनस्ते नराः स्मृताः॥
खण्डाभिर्निर्धना ज्ञेया विषमाभिर्नराधमाः॥ इति॥६८-६९॥
अथ शङ्खललाटलक्षणमाह—
उन्नतविपुलैः शङ्खैर्धनिनो निम्नैः सुतार्थसन्त्यक्ताः ।
विषमललाटा विधना धनवन्तोऽर्द्धेन्दुसदृशेन ॥७०॥
शुक्तिविशालैराचार्य्यता शिरासन्ततैरधर्मरताः ।
उन्नतशिराभिराढ्याः स्वस्तिकवत् संस्थिताभिश्च ॥७१॥
निम्नललाटा वधबन्धभागिनः क्रूरकर्मनिरताश्च ।
अभ्युन्नतैश्चभूपाः कृपणाः स्युः संवृतललाटाः ॥७२॥
ऊँची तथा बड़ी शंख ( कनपटी ) वाले धनी तथा नीची शंख वाले पुरुष पुत्र
तथा धन से रहित होते हैं। टेढ़ी ललाट वाले धनी, सीप के समान विशाल ललाट वाले
आचार्य, नाड़ियों से व्याप्त ललाट वाले पाप में रत, ललाट के मध्य में ऊँची नाड़ी
वाले धनी और ललाट में स्वस्तिक की तरह रेखा वाले पुरुष धनाढ्य होते हैं। निम्न
ललाट वाले वध, बन्धन के भागी और पाप कर्म में रत, ऊँचे ललाट वाले राजा तथा
गोल ललाट वाले कृपण होते हैं॥७०-७२॥
उन्नतैरुच्चैर्विपुलैर्विस्तीर्णैः शङ्खैर्धनिन ईश्वरा भवन्ति। निम्नैरनुच्चैः शङ्खैः सुतैः पुत्रैरथैर्धनैः
सन्त्यक्ता रहिता भवन्ति। तथा च—
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