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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 233, कुल 760 में से

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पृष्ठ 233

पुरुषलक्षणोध्यायः २०५
निर्मांसे मांरहिते जानुनी यस्य स प्रवासे पथि म्रियते। अल्पैः सूक्ष्मैर्जानुभिः
सौभाग्यम्। विकटैरतिविस्तीर्णैर्दरिद्रा निर्धना भवन्ति। निम्नैर्जानुभिः खेदयुक्तैः स्त्रीनिर्जिताः
स्त्रीभिर्निर्जिता भवन्ति। समांसैर्मांसयुक्तै राज्यं नृपत्वं भवति। महद्भिरतिस्थूलैरायुर्जीवितं
बहु भवति। तथा च समुद्रः—
निर्मांसे जानुनी यस्य प्रवासे म्रियते तु सः।
अल्पैर्भवति सौभाग्यं विकटैश्च दरिद्रता।।
स्त्रीजितः स्यात्तथा निम्नैर्मांसयुक्तैर्नराधिपः।
अतिस्थूलैश्चिरं कालं जीवेदैश्वर्यसंयुतः।। इति।।६।।
अथ लिङ्गलक्षणमाह—
लिङ्गेऽल्पे धनवानपत्यरहितः स्थूलेऽपि हीनो धनै-
र्मेढे वामनते सुतार्थरहितो वक्रेऽन्यथा पुत्रवान्।
दारिद्र्यं विनते त्वधोऽल्पतनयो लिङ्गे शिरासन्तते
स्थूलग्रन्थियुते सुखी मृदु करोत्यन्तं प्रमेहादिभिः ॥७॥
छोटे लिंग वाला मनुष्य धनी और सन्तानरहित, स्थूल लिंग वाला निर्धन, बाँईं
ओर झुका हुआ लिंग वाला पुत्र तथा धन से रहित, दाहिनी ओर झुका हुआ लिंग वाला
पुत्रवान, नीचे की ओर झुका हुआ लिंग वाला दरिद्र, नाड़ियों से व्याप्त लिंग वाला
अल्प पुत्र वाला, स्थूल ग्रन्थियुत लिंग वाला सुखी और कोमल आदि लिंग वाला
मनुष्य प्रमेह आदि रोगों से मरण पाने वाला होता है।।७।।
अल्पे लिङ्गे मेढ्रे धनवान् वित्तवान् भवति। अपत्यरहितश्च पुत्रवर्जितः, अतिस्थूले
लिङ्गे धनैर्हीनो दरिद्रो भवति। मेढ्रे लिङ्गे वामनते वामभागविनते सुतैः पुत्रैरर्थैर्धनै रहितो
वर्जितः। अन्यथा वक्रे दक्षिणविनते पुत्रवान् भवति। अधोभागे विनते लिङ्गदारिद्र्यं निर्धनत्वं
भवति। शिरासन्तते शिराबहुलेऽल्पतनयः स्वल्पपुत्रः। स्थूलेन ग्रन्थिना युते सुखी सुखितो
भवति। मृदुलिङ्गं मनुष्यं प्रमेहादिभिः कमलामूत्रकृच्छ्रगुह्यरोगैरन्तं करोति। म्रियत इत्यर्थः।।७।।
अत्रैवान्यलक्षणमाह—
कोशनिगूढैर्भूपा दीर्घैर्भग्नैश्च वित्तपरिहीनाः ।
ऋजुवृत्तशेफसो लघुशिरालशिश्नाश्च धनवन्तः ॥८॥
जिन पुरुषों का लिङ्ग चर्मकोश के द्वारा पूर्ण रूप से सुरक्षित अर्थात् आच्छादित
होता है, वे लोग राजा होते हैं एवं जिनका लिङ्ग लम्बायमान तथा स्पष्टतया टेढ़ा होता
है, वे लोग धनहीन होते हैं। इसी प्रकार जिनका लिङ्ग वर्तुलाकार, छोटे आकार वाला
या जिनके लिङ्ग की शिरायें ( अग्रभाग ) स्वल्प हों, वे धनवान होते हैं।।८।।
कोशेन चर्मणा भस्त्राकृतिना निगूढैराचितैर्लिङ्गैर्भूपा राजानो भवन्ति। दीर्घैर्लिङ्गैर्भग्नैः
स्फुटितैश्च वित्तपरिहीना निर्धना भवन्ति। ऋजुवृत्तशेफसः। ऋजु स्पष्टं वृत्तं परिवर्तुलं शेफो
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