बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्वलक्षणाध्यायः १७७
जिस कुतिया के तीन पाँवों में पाँच-पाँच नख और अगले बाँये पाँव में छः नख
हों, मल्लिका ( बेलापुष्प ) के समान जिसकी आँख हों, टेढ़ी पूँछ हो, पीला वर्ण हो
और लम्बे कान हों तो ऐसी कुतिया अपने स्वामी के राज्य की रक्षा करती है।।२।।
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां श्वलक्षणाध्यायो द्वाषष्टितमः ॥६२॥
यस्याः कुक्कुर्याः पादे पादे प्रतिचरणे पञ्च पञ्च नखाः कररुहाः। वामेऽग्रपादे चतुर्थ-
चरणे यस्याः षण्णखा भवन्ति। या च मल्लिकाक्षी। दृङ्मण्डलबाह्ये मल्लिकाकुसुम-
सदृश्यो राज्यो यस्या भवन्ति सा मल्लिकाक्षी। एवंविधाया मल्लिकाक्ष्या यस्याः पुच्छं
लाङ्गूलं वक्रं कुटिलं च। पिङ्गला लम्बकर्णा च या सा पुष्टा परिपोषिता राष्ट्रं पाति रक्षति।।२।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ श्वलक्षणं
नाम द्वाषष्टितमोऽध्यायः ॥६२॥
बृ० सं० द्वि०-१३ K Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA