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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 760 में से

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पृष्ठ 199

गोलक्षणाध्यायः १७१
अन्यदप्याह—
ये चोद्धरन्ति पादान् पङ्कादिव योजिताः कृशग्रीवाः ।
कातरनयना हीनाश्च पृष्ठतस्ते न भारसहाः ॥९॥
गाड़ी आदि में जोड़ा हुआ बैल, कर्दम में गड़े पाँव को उठाने की तरह पाँव उठाने
वाला, दुर्बल ग्रीवा वाला और छोटी या दबी हुई पीठ वाला बैल भार उठाने में समर्थ
नहीं होता है॥९॥
ते न भारसहा भारोद्वहने न समर्था इति। ये च वृषभा योजिता भारादौ नियुक्ताः पङ्कात्
कर्दमादिव पादान् खुरानुद्धरन्ति। कृशग्रीवा दुर्बलकन्धराः। तथा च पराशरः—
आपादक्षारकपिलाः कृष्णपुष्पचिताश्च ये।
मार्जारकपिलाक्षाश्च दुर्बला यूथघातिनः॥
पङ्कादिवार्ताः पादानुद्धरन्तो वृजन्ति ये।
अधूर्वहा भवन्त्येते भाराध्वनि विगर्हिताः॥ इति॥९॥
अधुना शुभलक्षणमाह—
मृदु