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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 121, कुल 760 में से

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पृष्ठ 121

दकार्गलाध्यायः ९३
अन्यदप्याह—
सकरीरा चेद्बदरी त्रिभिः करैः पश्चिमेन तत्राम्भः ।
अष्टादशभिः पुरुषैरैशानी बहुजला च शिरा ॥७४॥
करीर वृक्ष के साथ बेर का वृक्ष दिखाई दे तो उन वृक्षों से तीन हाथ आगे पश्चिम
दिशा में अट्ठारह पुरुषप्रमाण नीचे ईशान कोण में बहने वाली और बहुत जल वाली
शिरा होती है।।७४।।
चेच्छब्दो यद्यर्थे। यदि बदरी सकरीरा करीरवृक्षसहिता दृश्यते, तदा तत्र पश्चिमेन
पश्चिमायां दिशि त्रिभिः करैस्त्रिभिर्हस्तैः परतोऽष्टादशभिः पुरुषैः खातैरधोऽम्भः पानीयं
भवति। तत्र चैशानी शिरा बहुजला प्रभूततोया च वहति।।७४।।
अन्यदप्याह—
पीलुसमेता बदरी हस्तत्रयसम्मिते दिशि प्राच्याम् ।
विंशत्या पुरुषाणामशोष्यमम्भोऽत्र सक्षारम् ॥७५॥
यदि पीलु वृक्ष से युत बेर का वृक्ष हो तो उनसे तीन हाथ आगे पूर्व दिशा में बीस
पुरुषप्रमाण नीचे कभी न सूखने वाला खारा जल होता है।।७५।।
यदि पीलुसमेता पीलुवृक्षसहिता बदरी दृश्यते, तदा प्राच्यां पूर्वस्यां दिशि हस्तत्रयसम्मिते
करत्रयपरिच्छिन्ने देशे विंशत्या पुरुषाणामधोऽम्भो जलं भवति, तच्चाशोष्यं प्रभूतम्। सक्षारं
लवणसहितमित्यर्थः।।७५।।
अन्यदप्याह—
ककुभकरीरावेकत्र संयुतौ यत्र ककुभविल्वौ वा ।
हस्तद्वयेऽम्बु पश्चान्नैरैर्भवत् पञ्चविंशत्या ॥७६॥
जिस जगह अर्जुन और करीर या अर्जुन और बेल के वृक्ष का संयोग हो तो उन
वृक्षों से दो हाथ पर पश्चिम दिशा में पच्चीस पुरुषप्रमाण नीचे जल होता है।।७६।।
यत्र यस्मिन् प्रदेशे ककुभकरीरौ वृक्षौ एकत्र एकस्मिन् स्थाने संयुतौ समेतौ दृश्येते,
अथवा यत्र ककुभविल्वावेकत्र संयुतौ, तत्र पश्चात्पश्चिमायां दिशि हस्तद्वये परतः पञ्च-
विंशत्या नरैरम्बु जलं भवति।।७६।।
अन्यदप्याह—
वल्मीकमूर्धनि यदा दूर्वा च कुशाश्च पाण्डुराः सन्ति ।
कूपो मध्ये देयो जलमत्र नरैकविंशत्या ॥७७॥
यदि वल्मीक के ऊपर दूब या सफेद कुशा हो तो वल्मीक के नीचे कूप खोदने से
इक्कीस पुरुषप्रमाण नीचे जल मिलता है।।७७।।
यदा वल्मीकमूर्धनि वल्मीकोपरि दूर्वा शाद्वलं कुशा वा दर्भाश्च पाण्डुराः सन्ति भवन्ति,
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