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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पृष्ठ 645

अङ्गविद्याध्यायः ६०३
और बैर का फल हो तो क्रम से धन, सुवर्ण, द्विपद, लोहा, वस्त्र, चाँदी और औदुम्बर
( ताँबा ) की प्राप्ति कहनी चाहिए। जैसे बड़ का फल हाथ में हो तो धन की प्राप्ति,
महुआ का फल हाथ में हो तो सुवर्ण की प्राप्ति इत्यादि कहनी चाहिये।।१७।।
न्यग्रोधादिजातीफलैस्तत्सम्भवैः फलैः करगैर्हस्तगैर्धनाद्याप्तिर्भवति। तत्र न्यग्रोधजाती-
फलैः प्रष्टुर्हस्तस्थैर्धनाप्तिर्वित्तलाभो भवेत्। मधुकफलैः कनकस्य प्राप्तिः। तिन्दुकफलैः
पुरुषस्य द्विपदस्य प्राप्तिः। जम्बूफलैलौहस्य। प्लक्षफलैरंशुकस्य वस्त्रस्य। आम्रफलै
रूप्यस्य। बदरफलैरौदुम्बरस्य ताम्रस्येति। तथा च पराशरः—
'अश्वत्थन्यग्रोधफलैर्हस्तस्थैः पृच्छेद्वनागममादिशेत्। मधुकौदुम्बरफलैः काञ्चनागमम्।
द्विपदागमं तिन्दुकैः। वस्त्रागमं प्लक्षजैः। रूप्यस्यागममाम्रैः। ताम्रस्यागमं बदरैः। लोहस्या-
गमं जम्बूकैरिति वा' इति।।१७।।
अन्यदप्याह—
धान्यपरिपूर्णपात्रं कुम्भः पूर्णः कुटुम्बवृद्धिकरौ।
गजगोशुनां पुरीषं धनयुवतिसुहृद्विनाशकरम् ।।१८।।
यदि प्रश्नकाल में धान्यों से परिपूर्ण पात्र या पूर्ण घट दिखाई दे तो कुटुम्बों की
वृद्धि होती है। यदि हाथी की लीद, गाय का गोबर और कुत्ते की विष्ठा दिखाई दे तो
क्रम से धन का विनाश, युवती स्त्री का विनाश और मित्रों का विनाश कहना चाहिये।।१८।।
धान्येन परिपूर्णं पात्रं भाजनं कुम्भः पूर्णश्च तौ दृष्टौ कुटुम्बवृद्धिकरौ गजगोशुनां
पुरीषं यथासंख्यं धनयुवतिसुहृद्विनाशकरं भवति। गजस्य हस्तिन पुरीषं दृष्टं धनस्यैश्वर्यस्य
विनाशकरम्। गोपुरीषं गोमयं युवतीनां स्त्रीणां विनाशकरम्। शुनः पुरीषं सुहृदां मित्राणां
विनाशकरमिति। तथा च पराशरः—
'धान्यपात्रपूर्णोदकुम्भदर्शने कुटुम्बवृद्धिं जानीयात्। हस्तिना द्रव्यागमम्। हस्तिशकृतो
भ्रंशमैश्वर्यस्य वा। गोमयस्य स्त्रीव्यभिचारम्। शुनः सुहृद्विनाशम्' इति।।१८।।
अन्यदप्याह—
पशुहस्तिमहिषपङ्कजरजतव्याघ्रैर्लभेत् सन्दृष्टैः।
अविधननिवसनमलयजकौशेयाभरणसङ्घातम् ।।१९।।
यदि प्रश्नकाल में पशु, हाथी, भैंस, कमल, चाँदी और बाघ दिखाई दे तो क्रम से
कम्बल आदि ऊनी वस्त्र, धन, रेशमी वस्त्र, चन्दन, रेशमी वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति
होती है।।१९।।
पश्वादिभिः पृच्छासमये सन्दृष्टैरवलोकितैरव्याद्याभरणानां सङ्घातं समूहं प्रष्टा लभते।
तत्र पशुदर्शने आविकस्यौर्णिकस्य कम्बलादेर्लाभः। हस्तिनः करिणो दर्शने धनागमः।
महिषस्य दर्शने निवसनस्य क्षौमवस्त्रस्य। पङ्कजस्य पद्मस्य दर्शने मलयजस्य चन्दनस्य।
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