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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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४७० बृहत्संहिता
से भिन्न स्थान में स्थित होने पर राशि गोचर पीड़ा में स्थित रहती है, ऐसी राशि ) यदि
बली शुभग्रह ( बुध, गुरु और शुक्र ) से देखी जाती हो तो पीड़ा नहीं करती है अर्थात् वे
द्रव्य सम मूल्य में रहते हैं। यदि पापग्रह ( रवि, मंगल और शनि ) से देखी जाती हो तो
उस राशि के कथित द्रव्य महर्घ और दुर्लभ होते हैं।।१३।।
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां द्रव्यनिश्चयाध्याय एकचत्वारिंशः ॥४१॥
जीवादीनां चतुरादीनि स्थानानि यान्युक्तानि तद्व्यतिरिक्तेष्वन्येषु स्थानेषु यदा स्थिता
भवन्ति तदा गोचरपीडा तस्यां सत्यामपि राशिर्यदा शुभग्रहैर्बुधजीवशुक्रैर्बलिभिः सवीर्यैर्दृष्टो-
ऽवलोकितो भवति तदा पीडां न करोति। एतदुक्तं भवति—तद्द्रव्याणि नातिसमर्घाणि
भवन्ति। क्रूरैः पापग्रहैरादित्याङ्गारशनैश्चरैर्बलिभिर्गोचरपीडायां यदि राशिर्दृश्यते तदा विपर्यासो
विपरीतो भवति। तत्रोक्तद्रव्याणां महर्घता दुर्लभत्वं च भवति।।१३।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ द्रव्यनिश्चयो
नामैकचत्वारिंशोऽध्यायः ॥४१॥
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