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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पृष्ठ 495

प्रतिसूर्यलक्षणाध्यायः ४५३
दिशा में प्रतिसूर्य दिखाई दे तो वायु करता है। दोनों तरफ दिखाई दे तो राजा का और नीचे
की तरफ दिखाई पड़े तो लोगों का नाश करता है।।३।।
इति 'विमला' हिन्दीटीकायां प्रतिसूर्यलक्षणाध्यायः सप्तत्रिंशः ।।३७।।
इयमार्या अर्कचारे व्याख्याता। तथा च काश्यपः—
याम्ये वातप्रदो ज्ञेय उत्तरे वृद्धिदो रवेः।
उभयोः पार्श्वयोर्भाति सलिलं भूरि यच्छति।।
तथा च पराशरः—
दीप्ताग्निवर्णः कनकप्रभो वा सन्ध्यासु चेद्भास्करमावृणोति।
कम्पेत भूः खात्प्रपतेन्महोल्का नृपो विनश्येत्सहितः प्रजाभिः।।
सन्ध्यासमीपे यदि भास्करस्य दृश्येत माला प्रतिसूर्यकाणाम्।
सर्पा भवेयुः प्रचुराश्च चौरा रोगाश्च घोरा विविधप्रकाराः।।
प्रत्यर्कमिन्द्रायुधमत्स्यदण्डाः सविद्युदभ्राशनिवर्षवाताः।
भवन्त्यभीक्ष्णं दिनरात्रिसन्धौ भयं तदा भूमिपतेर्वधः स्यात्।। इति ।।३।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ प्रतिसूर्य-
लक्षणं नाम सप्तत्रिंशोऽध्यायः ।।३७।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA