बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४३० बृहत्संहिता
श्यावा श्याववर्णा। अरुणा रक्ता। नीला नीलवर्णा। असृग्रुधिरं तद्वर्णा। दहनसन्निभा
अग्निवर्णा। असितसन्निभा कृष्णा। भस्मसन्निभा भस्मवर्णा। रूक्षा अनिर्मला। सन्ध्यादिनजा
सन्ध्याया दिने च जाता। वक्रा कुटिला। दलिता खण्डिता। एवंविधा परागमभयाय भवति।
पराणां शत्रूणामागमाद्यद् भयं तत् करोति॥१६॥
अन्यदप्याह—
नक्षत्रग्रहघातैस्तद्भक्तीनां क्षयाय निर्दिष्टा।
उदये घ्नती रवीन्दू पौरेतरमृत्यवेऽस्ते वा॥१७॥
यदि उल्का नक्षत्र या ग्रह का उपघात करे तो नक्षत्र व्यूह में उक्त उस नक्षत्र या ग्रह
के भक्तियों का नाश करती है। यदि सूर्य या चन्द्र को उदय या अस्त समय में हनन करे
तो क्रम से पुरवासियों और बाहर रहने वालों का नाश करती है। जैसे—सूर्य हत हो तो
पुरवासियों का और चन्द्र हत हो तो बाहर रहने वालों का नाश करती है॥१७॥
नक्षत्रोपघातैर्ग्रहोपघातैश्च तद्भक्तीनां नक्षत्राणां नक्षत्रव्यूहे ग्रहाणां च या भक्त्य उक्तास्तासां
क्षयाय विनाशाय निर्दिष्टा कथिता उक्ता। तथा च काश्यपः—
नक्षत्राणि ग्रहाश्चैव यद्युल्काध्वस्तधूमिताः।
तद्देशनाथनाशाय लोकानां सम्भ्रमाय च॥
तथा च समाससंहितायाम्—
उदगादिषु विप्रादीन् सितलोहितकृष्णवर्णांश्च।
घ्नन्ति ग्रहर्क्षघातैस्तद्भक्तीनां च नाशाय॥
रवीन्दू सूर्य्याचन्द्रमसौ उदये उदयसमये अस्ते अस्तसमये वा घ्नती पौरेतराणां मृत्यवे
भवति। पौरा नागराः। इतरे यायिनः। आदित्ये हते पौराणां चन्द्रे च यायिनामिति॥१७॥
अथ नक्षत्रोपतापेन फलमाह—
भाग्यादित्यधनिष्ठामूलेषूल्काहतेषु युवतीनाम्।
विप्रक्षत्रियपीडा पुष्यानिलविष्णुदेवेषु ॥१८॥
ध्रुवसौम्येषु नृपाणामुग्रेषु सदारुणेषु चौराणाम्।
क्षिप्रेषु कलाविदुषां पीडा साधारणे च हते ॥१९॥
पूर्वफल्गुनी, पुनर्वसु, धनिष्ठा या मूल नक्षत्र की योगतारा यदि उल्का से हत हो तो
युवती स्त्रियों को पीड़ा होती है। पुष्य, स्वाती या श्रवण नक्षत्र की योगतारा यदि उल्का
से हत हो तो ब्राह्मण और क्षत्रियों को पीड़ा होती है।
उत्तरफल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तरभाद्रपदा, रोहिणी, मृगशिर, चित्रा, अनुराधा या रेवती
नक्षत्र की योगतारा यदि उल्का से हत हो तो राजाओं को पीड़ा होती है। पूर्वफल्गुनी,
पूर्वाषाढा, पूर्वभाद्रपदा, भरणी, मघा, आर्द्रा, श्लेषा, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र की योगतारा
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