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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पृष्ठ 467

उल्कालक्षणाध्यायः ४२५
उल्काथ पञ्चरूपा धिष्ण्योल्का विद्युतोऽशनिस्तारा।
धिष्ण्योल्के पक्षफले तत्त्रिगुणश्चाशनिः षडहिकेऽन्ये।।
फलपादकरी तारा धिष्ण्यार्द्धं पुष्कलं शेषाः।। इति।।२।।
अथ फलनियमार्थमाह—
तारा फलपादकरी फलार्द्धदात्री प्रकीर्तिता धिष्ण्या ।
तिस्रः सम्पूर्णफला विद्युदथोल्काशनिश्चेति ॥३॥
तारा फल का चतुर्थांश, धिष्ण्या फल का आधा तथा विद्युत्, उल्का, अशनि—ये
तीनों सम्पूर्ण फल को देती हैं।।३।।
तारा फलपादकरी, फलस्य पादं चतुर्भागं करोतीत्यर्थः। धिष्ण्या फलार्द्धं ददाति।
तिस्रो विद्युत्। उल्का। अशनिः। एतास्तिस्रः सम्पूर्णफलाः सम्पूर्णं यथा पठितं फलं
प्रयच्छन्ति।।३।।
अथाशन्याः कीदृग्लक्षणमित्येतदाह—
अशनिः स्वनेन महता नृगजाश्वमृगाश्मवेश्मतरुपशुषु ।
निपतति विदारयन्ती धरातलं चक्रसंस्थाना ॥४॥
अशनि अधिक शब्द करती हुई, पृथ्वी को विदारण करती हुई और चक्र की तरह
भ्रमण करती हुई मनुष्य, हाथी, घोड़ा, मृग, पत्थर, घर, वृक्ष या पशुओं पर गिरती है।।४।।
अशनिर्महता स्वनेन शब्देन युक्ता निपतति। नृगजेति। ना मनुष्यः। गजो हस्ती।
अश्वस्तुरगः। मृग आरण्यप्राणी। अश्मा पाषाणः। वेश्म गृहम्। तरुर्वृक्षः। पशुर्गवादिः।
एतेषूपरि निपतति। तथा धरातलं भूतलम्। चक्रसंस्थाना चक्रवद्भ्रमन्ती विदारयन्ती च
निपतति। तथा च समाससंहितायाम्—
अशनिः प्राणिषु निपतति दारयति धरातलं बृहच्छब्दाः।। इति।।४।।
अथ विद्युल्लक्षणमाह—
विद्युत् सत्त्वत्रासं जनयन्ती तटतटस्वना सहसा ।
कुटिलविशाला निपतति जीवेन्धनराशिषु ज्वलिता ॥५॥
विद्युत् प्राणियों में भय उत्पन्न करती हुई, तट-तट ( तर-तर ) शब्द करती हुई,
कुटिल और विस्तृत शरीर वाली, प्राणियों या काष्ठ राशियों पर प्रज्वलित होकर बहुत
जल्दी गिरती है।।५।।
विद्युत् सत्त्वानां प्राणिनां त्रासं भयं जनयन्ती उत्पादयन्ती। तटतटस्वना तटतटेति
शब्दं क्रियमाणा। अव्यक्तशब्देति यावत्। तथा कुटिलविशाला कुटिला वक्रा विशाला
विस्तीर्णा। जीवेन्धनराशिषु, जीवेषु प्राणिषु, इन्धनराशिषु काष्ठनिचयेषु। ज्वलिता सज्वाला
सहसा झटित्येव निपतति। तथा च—
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