बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दिग्दाहलक्षणाध्यायः
अथ दिग्दाहलक्षणं व्याख्यायते। तत्रादावेव वर्णभेदनं तस्यैव फलमाह—
दाहो दिशां राजभयाय पीतो देशस्य नाशाय हुताशवर्णः ।
यश्चारुणः स्यादपसव्यवायुः सस्यस्य नाशं स करोति दृष्टः ॥१॥
यदि दिग्दाह पीत वर्ण का हो तो राजभय के लिये, अग्नि वर्ण का हो तो देशनाश के
लिए और बायीं तरफ लोहित वर्ण का वायु दिखाई दे तो धान्यों का नाश करता है।।१।।
दिशां दाहो दिग्दाहः। पीतः पीतवर्णो राजभयाय नृपभीतये भवति। तथा हुताशवर्णो-
ऽग्निसमप्रभो देशस्य जनपदस्य नाशाय क्षयाय भवति। यश्चारुणो लोहितवर्णः स्याद्भवेत्
स चापसव्यवायुः, अपसव्यो वामो वायुर्यस्य स दृष्टोऽवलोकितः सस्यस्य नाशं क्षयं
करोतीति ।।१।।
अथान्यदप्याह—
योऽतीव दीप्त्या कुरुते प्रकाशं छायामपि व्यञ्जयतेऽर्कवद्यः ।
राज्ञो महद्वेदयते भयं स शस्त्रप्रकोपं क्षतजानुरूपः ॥२॥
जो दिग्दाह अपनी अत्यधिक कान्ति से प्रकाशित होता है और सूर्य की तरह
दृश्यमान द्रव्य की छाया को भी प्रकाशित करता है, वह राजा को अधिक भय देता है
तथा यदि वह रक्त वर्ण का हो तो शस्त्र का भय करता है।।२।।
यो दिग्दाहोऽतीव दीप्त्या अतिकान्त्या प्रकाशं कुरुते उद्योतं जनयति। तथा योऽर्कवदा-
दित्यवच्छायामपि व्यञ्जयते प्रकाशयति। दृश्यमाना ये भावास्तदीयां छायामुत्पादयतीत्यर्थः।
स च राज्ञो नृपस्य महद्भयं वेदयते आख्याति। क्षतजानुरूपो रक्तवर्णोऽतिलोहित इत्यर्थः।
स शस्त्रकोपं करोति।।२।।
अथ सर्वासु दिक्षु फलमाह—
प्राक्क्षत्रियाणां सनरेश्वराणां प्राग्दक्षिणे शिल्पिकुमारपीडा ।
याम्ये सहोग्रैः पुरुषैस्तु वैश्या दूताः पुनर्भूप्रमदाश्च कोणे ॥३॥
पश्चात्तु शूद्राः कृषिजीविनश्च चौरास्तुरङ्गैः सह वायुदिक्स्थे ।
पीडां व्रजन्त्युत्तरतश्च विप्राः पाखण्डिनो वाणिजकाश्च शार्व्याम् ॥४॥
यदि पूर्व दिशा में दिग्दाह दिखाई दे तो वह राजा के साथ-साथ सभी क्षत्रियों को पीड़ित
करता है। आग्नेय कोण में दिखाई दे तो शिल्पी (लुहार, सोनार आदि) और कुमारों को
पीड़ित करता है। दक्षिण में दिखाई दे तो क्रूर मनुष्य, वैश्य, दूत और पुनर्भू स्त्री (जो
अक्षतयोनि होकर पुनः शादी करती है) को पीड़ित करता है। पश्चिम दिशा में दिखाई दे
तो शूद्र और किसानों को पीड़ित करता है। वायव्य कोण में दिखाई दे तो घोड़े के साथ चोरों
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