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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पृष्ठ 432

३९० बृहत्संहिता
वर्षत्यपि रटति यदा गोमायुश्च प्रदोषवेलायाम् ।
सप्ताहं दुर्द्दिनमपि तदा पयो नात्र सन्देहः१ ॥२४॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां
सद्योवर्षणाध्यायोऽष्टाविंशः ॥२८॥
यदि रात्रि में जुगनू मेघ के समीप तक जाय तो शीघ्र मेघ धान्य के क्षेत्रों को पूर्ण
करने वाली वृष्टि करता है।
यदि प्रदोष समय में वर्षा हो या सियार भूंकें तो निश्चय करके सात दिन तक दुर्द्दिन
और वृष्टि होती है।।२३-२४।।
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां सद्योवर्षणाध्यायोऽष्टाविंशः ॥२८॥
१. पद्यद्वयमिदमनार्षत्वात्केनचित्प्रक्षिप्तमिति प्रतिभाति।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammu. Digitized by S3 Foundation USA