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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पृष्ठ 406

३६४ बृहत्संहिता
अथादर्शने चन्द्रमसः फलमाह—
दृश्यते न यदि रोहिणीयुतश्चन्द्रमा नभसि तोयदावृते।
रुग्भयं महदुपस्थितं तदा भूश्च भूरिजलसस्यसंयुता ॥३६॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां रोहिणी-
योगाध्यायश्चतुर्विंशः ॥२४॥
मेघ से ढके हुये आकाश में रोहिणी योग के समय यदि चन्द्र नहीं दिखाई दे तो उस
वर्ष में अतिशय रोग का भय होता है तथा पृथ्वी बहुत धान्य और वृष्टि से युत होती है।
इति 'विमला' हिन्दीटीकायां रोहिणीयोगाध्यायश्चतुर्विंशः ॥२४॥
यदि नभस्याकाशे तोयदावृते मेघच्छन्ने चन्द्रमा रोहिणीयुतो न दृश्यते लोके तदा
तस्मिन् वर्षे महदतीव रुग्भयं रोगभयमुपस्थितं प्राप्तं वदेत्। भूश्च भूमिर्भूरिजलसस्यसंयुता
बहुभिस्तोयैः सस्यैश्च युक्ता भवतीति॥३६॥
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ रोहिणी-
योगो नाम चतुर्विंशोऽध्यायः ॥२४॥