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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पृष्ठ 324

२८४ बृहत्संहिता
गाम्भीरिका च सरयू रथाख्या गण्डकी नदी।
गान्धर्वा लेखहाराश्च तथोदाराश्च कृत्रिमाः॥
वैदेहाः सर्वजलजाः काम्बोजाश्च सुराष्ट्रिकाः।
गन्धयुक्तिविदो ये च सौगन्धिपदलेपनाः॥
सुवर्णरजतं रत्नं मातङ्गतुरगादि यत्।
पौरा जनपदाः सौम्याः सोमपुत्रवशे स्थिताः॥ इति॥१५-१९॥
अथ गुरोराह—
सिन्धुनदपूर्वभागो मथुरापश्चार्द्धभरतसौवीराः।
स्रुघ्नौदीच्यविपाशासरिच्छतद्रू रमठशाल्वाः॥२०॥
त्रैगर्तपौरवाम्बष्ठपारता वाटधानयौधेयाः।
सारस्वतार्जुनायनमत्स्यार्द्धग्रामराष्ट्राणि ॥२१॥
हस्त्यश्वपुरोहितभूपमन्त्रिमाङ्गल्यपौष्टिकासक्ताः ।
कारुण्यसत्यशौचव्रतविद्यादानधर्मयुताः ॥२२॥
पौरमहाधनशब्दार्थवेदविदुषोऽभिचारनीतिज्ञाः ।
मनुजेश्वरोपकरणं छत्रध्वजचामराद्यं च॥२३॥
शैलेयकुष्ठमांसीतगररससैन्धवानि वल्लीजम्।
मधुररसमधूच्छिष्टानि चोरकश्चेति जीवस्य॥२४॥
सिन्धु नद के पूर्व भाग, मथुरा के पश्चिमार्द्ध, भरत, सौवीर, स्रुघ्न, उत्तर दिशा में रहने
वाले, विपाशा नदी, शतद्रू नदी, रमठ, शाल्व, त्रैगर्त, पौरव, अम्बष्ठ, पारत, वाटधान,
यौधेय, सारस्वत, अर्जुनायन और मत्स्य देशों के ग्राम और राष्ट्र का आधा भाग, हाथी,
घोड़ा, पुरोहित, राजा, मन्त्री, मङ्गल कार्य ( विवाह, उपनयन आदि ) में सक्त, पौष्टिक
कार्य में संलग्न, दयालु, सत्य भाषण करने वाले, शौचयुत ( शुद्ध = दूसरे के धनादि को
नहीं चाहने वाले ), तपस्वी, विद्वान्, दानी, धर्मी, ग्राम में उत्पन्न होने वाले, वैयाकरण,
अर्थ को जानने वाले, वेद को जानने वाले, अभिचारज्ञ, नीतिशास्त्र को जानने वाले, राजा
के उपकरण ( आयुध, सन्नाह आदि ), छत्र, ध्वजा, चामर आदि, सुगन्ध द्रव्य, कुष्ठ,
मांसी, तगर, रस ( बोल ), नमक, मूंग आदि, मधुर रस, मधूच्छिष्ट (सिक्थक =
मोम ), चोरक, सुगन्ध द्रव्य—इन सबों का स्वामी गुरु है॥२०-२४॥
सिन्धुनदस्य पूर्वभागः। मथुरायाः पश्चार्द्धम्। भरता जनाः। सौवीराः। स्रुघ्नो देशः।
औदीच्या उत्तरदिङ्निवासिनो जनाः। विपाशा सरिन्नदी। शतद्रूः। रमठा जनाः। शाल्वाः।।
त्रैगर्ताः। पौरवाः। अम्बष्ठाः। पारताः। वाटधानाः। यौधेयाः। सारस्वताः। अर्जुना-
यनाः। मत्स्या जनास्तद्विषयाद् ग्रामराष्ट्राद्धम्।
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