बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७२ बृहत्संहिता
अति शूर, कुलीन, धनी, यशस्वी, दूसरे के धन का अपहरण करने वाले, दूसरे को
जीतने की इच्छा करने वाले राजा, सेनापति—ये सब ज्येष्ठा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।।१६।।
अतिशूरा अतिसंग्रामधीराः। कुलेनाभिजनेन वित्तेन धनेन यशसा कीर्त्या ये अन्विताः
संयुक्ताः। परस्वहतः परधनहन्तारः। ये च नरेन्द्रा राजानो विजिगीषवः परान् जेतुमिच्छवः।
ये च सेनानां नेतारः सेनापतयः। एते सर्व एव पौरन्दरे ज्येष्ठायाम्।।१६।।
अथ मूल आह—
मूले भेषजभिषजो गणमुख्याः कुसुममूलफलवार्ताः।
बीजान्यतिधनयुक्ताः फलमूलैर्ये च वर्तन्ते ।।१७।।
औषध, वैद्य, समूह में प्रधान, पुष्प, मूल और फल से आजीविका चलाने वाले, नव
प्रकार के बीज, अतिधनी, फलाहारी, कन्दाहारी—ये सब मूल नक्षत्रगत पदार्थ हैं।।१७।।
भेषजमौषधम्। भिषजो वैद्याः। गणमुख्याः समूहप्रधानाः। कुसुममूलफलवार्ताः।
कुसुमानि पुष्पाणि, मूलानि फलानि च वार्ता वृत्तिर्येषाम्। बीजानि सर्वाणि यान्युप्यन्ते।
ये चातिधनयुक्ताः प्रभूतवित्तसमन्विताः। ये च फलमूलैर्वर्तन्ते जीवन्ति। ते सर्व एव
मूले।।१७।।
अथ पूर्वाषाढायामाह—
आप्ये मृदवो जलमार्गगामिनः सत्यशौचधनयुक्ताः।
सेतुकरवारिजीवकफलकुसुमान्यम्बुजातानि ।।१८।।
कोमल हृदय वाले, जल-मार्ग से चलने वाले ( धीवर, जल में रहने वाले प्राणी
आदि ), सत्य भाषण करने वाले, दूसरे के धन आदि को नहीं चाहने वाले, धनी, पुल
बनाने वाले, जल से आजीविका चलाने वाले, जल से उत्पन्न फल और पुष्प—ये सब
पूर्वाषाढा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।।१८।।
मृदवो मार्दवयुक्ताः। जलमार्गगामिनो जलमार्गेण ये गच्छन्ति ते जलमार्गगामिनो
धीवरा जलप्राणिनश्च। सत्ययुक्ताः सत्यभाषिणः। शौचयुक्ताः परधनादिष्वलुब्धाः। धन-
युक्ता ईश्वराः। सेतुकराः सेतुं ये कुर्वन्ति। वारिजीवका वारिणा जलेन ये जीवन्ति तेनै-
वार्थार्जनं कुर्वन्ति। यानि चाम्बुजातानि जलसम्भूतानि फलानि कुसुमानि च। ते सर्व एवा-
ऽऽप्ये पूर्वाषाढायाम्।।१८।।
अथोत्तराषाढायामाह—
विश्वेश्वरे महामात्रमल्लकरितुरगदेवतासक्ताः।
स्थावरयोधा भोगान्विताश्च ये तेजसा युक्ताः ।।१९।।
महामात्र ( मुख्य मन्त्री = 'महामात्राः प्रधानानि' इत्यमरः ), मल्ल, बाहुयुद्ध में
कुशल, हाथी, घोड़ा, देवताओं के भक्त, स्थावर ( वृक्ष आदि ), युद्ध में कुशल, भोगी,
तेजस्वी—ये सब उत्तराषाढा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।।१९।।
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