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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 800 में से

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अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३५५
इस प्रकार ग्रहयोगवश शाप को जानकर उस दोष के शान्त्यर्थ
नाग की पूजा करे।।१६।।
स्वगृह्योक्तविधानेन प्रतिष्ठां कारयेत्सुधीः।
नागमूर्तिं सुवर्णेन कृत्वा पूजां समाचरेत् ।।१७।।
अपने वेदोक्त गृह्यसूत्र के अनुसार विधानपूर्वक सुवर्ण की नांगमूर्त्ति
बनाकर उसकी प्रतिष्ठा करे और उसका यथोक्त रीति से पूजन करे।।१७।।
गोभूतिलहिरण्यादि दद्याद्वित्तानुसारतः।
एवं कृते तु नागेन्द्रप्रसादाद्वर्धते कुलम् ।।१८।।
गौ, भूमि, तिल, सुवर्णादि का दान अपनी शक्ति के अनुसार करे।
ऐसा करने से नागदेव प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि करते हैं।।१८।।
अथ पितृशापात्सुतक्षययोगम्—
पुत्रस्थानगते भानौ नीचे मन्दाशकस्थिते।
पार्श्वयोः क्रूरसम्बन्धे पितृशापात्सुतक्षयः ।।२०।।
पंचम स्थान में सूर्य अपनी नीच राशि में शनि के अंश में हों और उसके
आगे तथा पीछे पापग्रह हों तो पिता के शाप से संतान की हानि होती
है।।१९।।
पुत्रस्थानाधिपे भानौ त्रिकोणे पापसंयुते।
क्रूरेऽन्तरे पापद्रष्टे पितृशापात्सुतक्षयः ।।२०।।
पुत्रस्थानेश सूर्य हो, क्रूरग्रहों के मध्य में त्रिकोण में पापग्रह हों, पापग्रह
से देखे जाते हों तो पिता के शाप से वंश की क्षति होती है।।२०।।
भानुराशिस्थिते जीवे पुत्रेषु भानसंयुते।
पुत्रे लग्ने पापयुते पितृशापात्सुतक्षयः ।।२१।।
सूर्य की राशि में गुरु हो और पंचमेश सूर्य से युत हो तथा पंचम
और लग्न में पापग्रह हों तो पिता के शाप से सन्तान की हानि होती
है।।२१।।
लग्नेशे दुर्बले पुत्रे पुत्रेशे भानुसंयुते।
पुत्रे लग्ने पापयुते पितृशापात्सुतक्षयः ।।२२।।
लग्नेश दुर्बल होकर पंचम भाव में हो और पंचमेश सूर्य से युतः हों तथा
पंचम और लग्न में पापग्रह हों तो पिता के शाप से संतान की हानि होती
है।।२२।।