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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 352, कुल 800 में से

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पृष्ठ 352

३५४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्

पंचमेश राहु से युक्त हो, पंचम में शनि हो और चन्द्रमा से युत वा दृष्ट
हो तो सर्प के शाप से संतान नष्ट होते हैं ॥९॥
कारके राहुसंयुक्ते पुत्रेशे बलवर्जिते।
विलग्नेशे भौमयुते सर्पशापात्सुतक्षयः ॥१०॥
कारक (गुरु) राहु से युक्त हो, पंचमेश बलहीन से लग्नेश भौम से युत
हो तो सर्प के शाप से संतान नष्ट होते हैं ॥१०॥
कारके भौमसंयुक्ते लग्ने च राहुसंयुते।
पुत्रस्थानेश्वरे दुःस्थे सर्पशापात्सुतक्षयः ॥११॥
कारक (गुरु) भौम से युक्त हो, लग्न में राहु हो और पंचमेश ६।८।१२
भाव में हो तो सर्प के शाप से संतान की हानि होती है ॥११॥
भौमांशे भौमसंयुक्ते पुत्रेशे सोमनन्दने।
राहुमान्दियुते लग्ने सर्पशापात्सुतक्षयः ॥१२॥
भौम के अंश में भौम से युक्त पंचमेश बुध हो और लग्न, राहु, मान्दि
(गुलिक) हो तो सर्ग के शाप से संतान की हानि होती है ॥१२॥
पुत्रस्थाने कुजक्षेत्रे पुत्रे राहुसमन्विते।
सौम्यदृष्टे युते वापि सर्पशापात्सुतक्षयः ॥१३॥
यदि पंचम भाव मंगल की राशि (७, ८) हो और पंचम में राहु युत हो,
बुध से युत वा दृष्ट हो तो सर्प के शाप से संतान की हानि होती है ॥१३॥
पुत्रस्था भानुमन्दाराः स्वर्भानुः शशिजोऽङ्गिराः।
निर्बलौ पुत्रलग्नेशौ सर्पशापात्सुतक्षयः ॥१४॥
पंचम भाव में सूर्य, शनि, मंगल, राहु, बुध, गुरु हों और पंचमेश, लग्नेश
निर्बल हों तो सर्प के शाप से संतान की हानि होती है ॥१४॥
लग्नेशे राहुसंयुक्ते पुत्रेशे भौमसंयुते।
कारके राहुसन्दृष्टे सर्पशापात्सुतक्षयः ॥१५॥
लग्नेश राहु से युत हो, पंचमेश मंगल से युत हो, कारक (गुरु) राहु
से युत हों तो सर्प के शाप से सन्तान की हानि होती है।।
अथ शान्तिमाह—
ग्रहयोगवशादेवं योगं ज्ञात्वा सुधीमता।
तद्दोषपरिहारार्थं नागपूजां समारभेत् ॥१६॥