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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 800 में से

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पृष्ठ 262

२६४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
संस्कृतांशायुचक्रम्

सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ल.ग्रहायुयोग
७००१२७२१९वर्ष४०
१९१८७२२६४८मास४
९१७१७९१०९दिन२९
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अथ पिण्डायुसाधनम्-
१. तत्रादौ पिण्डायुषि वर्षाणि-
नन्देन्दवो पञ्च यमाः शरक्ष्मा भास्कराश्च पञ्चेन्दवः कुपक्षाः।
नखाश्च रव्यादिमुखग्रहाणां पिण्डायुषोऽब्दाः निजोच्चगानाम् ।।
सूर्यादि ग्रह अपनी उच्चराशि में हों तो पिण्डायुसाधन में क्रम से
१९, २५, १५, १२, १५, २१, २० सूर्यादि ग्रहों के वर्ष होते हैं।।७।।
निसर्गायुसाधने वर्षादिः-
कृत्येकद्व्यङ्कधृत्यश्च नखपञ्चाशदेव हि।
सूर्यादीनां क्रमादब्दाः स्वोच्चे नैसर्गिके द्विज ।।८।।
सूर्यादि ग्रह अपनी उच्चराशि में हो तो क्रम से २०, १, २, ९, १८, २०,
५० वर्ष नैसर्गिक आयु में होते हैं।।८।।
पिण्ड-निसर्गायुसाधनम्-
स्वोच्चशुद्धो ग्रहः शोध्यः षड्भादूनो भमण्डलात् ।
षड्भाधिको यथास्थित एव लिप्तानिघ्नो निजाब्दैः ।।९।।
जिस ग्रह की पिण्डायु या निसर्गायु साधन करना हो उसके राश्यादि
को उसके परमोच्च राश्यादि में घटाकर शेष ६ राशि से न्यून हो तो उसे
१२ राशि में घटावे। यदि शेष ६ राशि से अधिक हो तो राश्यादि की