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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 263, कुल 800 में से

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पृष्ठ 263

आयुर्दायाध्यायः २६५
कला बनाकर उसे ग्रहवर्ष संख्या (पिण्डायुसाधन में पिण्डायु ग्रहवर्ष,
निसर्गायुसाधन में नैसर्गिक ग्रहवर्ष) से गुणा कर।।९।।
खाभ्ररसभूनेत्रैर्भक्ते प्राप्यते तु यत्फलम्।
वर्षमासदिनादिकं तद्धि पिण्डायुः स्फुटं भवेत्।
एवं क्रियानिसर्गेऽपि हानिवृद्धिस्तु पूर्ववत् ।।१०।।
२१६०० से भाग देने से लब्धि वर्ष, मास, दिनादि पिण्डायु या निसर्गायु
होते हैं।।१०।।
० पिण्डायु-साधन का उदाहरण—
सूर्योच्चांशराश्यादि = ०।१०।०।० में
सूर्य = ३।१८।२६।३४ को घटाया तो
उच्चांशान्तर ८।१२।३३।२६ हुआ।
नोट— यह ६ राशि से अधिक हैं अतः १२ राशि में नहीं घटाया गया।
इसी प्रकार प्रत्येक ग्रह का चक्र शुद्ध उच्चांशान्तरचक्र नीचे लिखा है।
ग्रहोच्चांशान्तरचक्रम्—

सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ग्रह
८१०१११०१०९११राशि
२११०५२३२२२११८अंश
३३२९२७२२९१६११कला
२६१३५२५९६५५८विकला

सूर्यपिण्डायुसाधनम्—
उदाहरण— परमोच्चांशान्तर ८।२१।३३।२६ पिण्डायु वर्ष १९
राशि ८ × १९ = मास १५२ ÷ १२ = वर्षादि १२।८
अंश २१ × १९ = दिन ३९९ ÷ ३० = मासादि १३।९
कला ३३ × १९ = घटी ६२७ ÷ ६० = दिनादि १०।२७
विकला २६ × १९ = पल ४९४ ÷ ६० = घट्यादि ८।१४
वर्षादि = १२।८।०।०।०
मासादि = ०।१३।९।०।०
दिनादि = ०।०।१०।२७।०
घट्यादि = ०।०।०।८।१४
सूर्यायुवर्षादि = १२।२१।१९।३५।१४ इस प्रकार प्रत्येक ग्रहों का पिंडायु
एवं निसर्गायु साधन कर असंस्कृतपिण्डायु चक्र और असंस्कृतनिसर्गायु
चक्र दिया जाता है।