बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दायाध्यायः २६३
लग्नायु को त्रैराशि द्वारा लाना चाहिए, जिसके लिए नीचे दी हुई
तालिका से काम लेना चाहिए।
१ राशि वा ३० अंश = १ वर्ष = १२ मास
∴ १ मास = ३०/१२ = २ १/२ अंश
∴ १ अंश = १२ दिन = ६० कला
∴ १ दिन = ५ कला = ६० घटी
∴ १ कला = १२ घटी = ६० विकला
∴ १ घटी = ५ विकला = ६० पल
∴ १ विकला = १२ पल
अर्थात्
१ राशि = १२ मास
१ अंश = १२ दिन
१ कला = १२ घटी
१ विकला = १२ पल
तात्पर्य यह हुआ कि अंश को २ से गुणाकर ५ से भाग देने से लब्धि
मास शेष को ६ से गुणा कर देने से दिन होता है। कला को २ से गुणा
कर १० से भाग देने से लब्धि दिन शेष को ६ से गुणा देने से घटी होता
है। विकला को २ से गुणाकर १० से भाग देने से लब्धि घटी और शेष
को ६ से गुणा करने से पल होता है।
लग्न राश्यादि ९।१५।३२।५१ बलवान् है अतः राशितुल्य वर्ष ९ प्राप्त
हुआ, शेष अंशादि १५।३२।५१ का त्रैराशिक द्वारा मासादि का साधन-
अंश १५ × २ = ३० ÷ ५ = लब्धि ६ मास, शेष ० × ६ = ०
दिन कला ३२ × २ = ६४ ÷ १० = लब्धि ६ दिन, शेष ४ × ६ = २४
घटी विकला ५१ × २ = १०२ ÷ १० = लब्धि १० घटी, शेष २ × ६
= १२ पल।
राशितुल्य वर्षादि- ९।०।०।०।०
अंशोत्पन्न मासादि- ०।६।०।०।०
कलोत्पन्न दिनादि- ०।०।६।२४।०
विकलोत्पन्न घट्यादि- ०।०।६।१०।१२
योगफल- ९।६।६।३४।१२ में
पूर्वोक्त लग्नायुर्वर्षादि- ६।१।२९।९।३८ को जोड़ा तो
स्पष्ट लग्नायुवर्षादि- १५।८।५।४२।० हुए।