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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 260, कुल 800 में से

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पृष्ठ 260

२६२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
असंस्कृतांशायुचक्रम्

सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ल.ग्रहायु
८००१३७३६वर्ष
६९९७१०६६१मास
१११३११७५१९२९दिन
४९२४५०२२३७३३५७७घटी
१२३६२४१२१२०३६४८पल
विशेष संस्कार
सूर्य सातवें भाव में है, अतः सूर्यायुवर्षादि ८।६।११।४९।१२ ÷ ६ =
१।५।१।५८।१२ लब्धि वर्षादि हुई। इस लब्धि को सूर्यायु
८।६।११।४९।१२ में
लब्धि- १।५।१।५८।१२ को घटाया तो
= स्पष्टसूर्यायुवर्षादि ७।१।९।५१।० हुए।
चन्द्र में हानि-वृद्धि का कोई योग न होने के कारण स्पष्ट चन्द्रायुवर्षादि
०।९।१।२४।३६ हुए।
भौम अपने नवमांश (मेष) में होने के कारण भौमायु ०।९।३।५०।२४
× २ = ०।१८।७।४०।४८ भौम का स्पष्टायुवर्षादि हुआ।
बुध में हानि वृद्धि के कोई योग न होने से स्पष्ट बुधायुवर्षादि =
१।७।११।२२।१२ हुए।
गुरु आठवें भाव में है अतः आधा भाग कम होना चाहिए, अतः गुरु
की आयुवर्षादि ३।१०।७।३७।१२ ÷ २ = १।११।३।४८।३६ लब्धि को
गुरु आयुवर्षादि ३।१०।७।३७।१२ में
लब्धि १।११।३।४८।३६ घटाया तो
शेष १।११।३।४८।३६ वर्षादि हुए।
गुरु अपने द्रेष्काण का है अतः हानिकृत गुरु आयुवर्षादि
१।११।३।४८।३६ ×२ = २।२२।७।३७।१२ स्पष्ट गुरु की आयु हुई।
शुक्र में कोई हानि-वृद्धि के योग न होने से स्पष्ट शुक्रायुवर्षादि
७।६।५।३३।० हुए।
शनि शत्रु राशि में है, अतः शनि के आयुवर्षादि ३।६।१९।५७।३६
÷ ३ लब्धि १।२।५।१९।१२ को घटाना चाहिए। अतः शनि की आयुवर्षादि
३।६।१९।५७।३६ में
लब्धि १।२।५।१९।१२ को घटाया तो
स्पष्टशन्यायु २।४।१०।३८।२४ वर्षादि हुए।