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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 800 में से

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१३२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
पद से १२वें भाव में शुभग्रह-पापग्रह युत हों और देखते हों तो विशेष
लाभ के कारण द्रव्य का अधिक खर्च होता है।। १५५।।
शुभग्रहे सुमार्गेषु कुमार्गात्पापखेचरैः।
मिश्रैर्मिश्रफलं वाच्यं यथालाभेषु पूर्ववत् ।।१६।।
शुभग्रह का संबंध होने से सुमार्ग में और पापग्रह का संबंध होने से कुमार्ग
में व्यय होता है। दोनों (शुभ-पाप) के रहने से दोनों मार्ग में व्यय होता
है।।१६।।
आरूढाद्द्वादशे शुक्रे भानुस्वर्भानुवीक्षिते ।
राजमूलाद्व्ययं वाच्यं चन्द्रदृष्ट्या विशेषतः ।।१७।।
आरूढ से १२वें शुक्र हो, सूर्य-राहु से देखा जाता हो तो राजा के द्वारा
व्यय होता है। चन्द्रमा देखता हो तो विशेष व्यय होता ही है।।१७।।
आरूढाद्द्वादशे सौम्ये शुभखेटयुतेक्षिते।
ज्ञातिमध्ये व्ययो नित्यं पापदृक्कल्हाद्व्ययः।।१८।।
आरूढ़ से १२वें भाव में बुध हो और शुभग्रह से दृष्ट वा युत
हो तो जाति (भाई-बंधु) में व्यय होता है और पापग्रह देखता हो
तो कलह होने से व्यय होता है।।१८।।
पदाद्व्यये सुराचार्ये वीक्षिते चान्यखेचरैः।
करमूलाद्व्ययं वाच्यं करवाजेन वै द्विज ।।१९।।
पद से १२वें भाव में गुरु हो और अन्य ग्रहों से देखा जाता हो तो कर
(लगान) आदि से व्यय होता है।।१९।।
आरूढाद्द्वादशे सौरी धरापुत्रेण संयुते।
अन्यग्रहेक्षिते विप्र भ्रातृमूलाद्धनव्ययम् ।।२०।।
आरूढ से व्ययभाव में शनि हो और भौम से देखा जाता हो तथां
शेष ग्रहों से देखा जाता हो तो भाई, कुटुंब के कारण धन का व्यय होता
है।।२०।।
पदाद्द्वादशे भावे ये योगा गदिता मया।
लाभस्थानेषु ते योगा लाभयोगकराः सदा।।२१।।
पद से बारहवें भाव में जिन योगों को मैंने कहा है वे ही योग लाभभाव
में हों तो लाभ करने वाले होते हैं।।२१।।