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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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मातंग कन्या प्रादुर्भाव वर्णन ] । ४५१

रौप्यशालस्यांतराले सप्तयोजनविस्तरः ।
हेमशालः प्रकथितः पूर्ववद्द्वारशोभितः ॥७८
तयोर्मध्ये मही प्रोक्ता कदम्बतरुवाटिका ।
तत्र दिव्या नीपवृक्षा योजनद्वयमुन्नताः ॥७९
सदैव मदिरास्पंदा मेदुरप्रसवोज्ज्वलाः ।
येभ्यः कादम्बरी नाम योगिनी भोगदायिनी ॥८०
विशिष्टा मदिरोद्याना मंत्रिण्याः सततं प्रिया ।
ते नीपवृक्षाः सुच्छायाः पत्रलाः पल्लवाकुलाः ।
आमोदलोलभृङ्गालीझंकारैः पूरितोदराः ॥८१
तत्रैव मंत्रिणीनाथामन्दिरं सुमनोहरम् ।
कदम्बवनवाट्यास्तु विदिक्षु ज्वलनादितः ॥८२
चत्वारि मंदिराण्युच्चैः कल्पितान्यादिशिल्पिना ।
एकैकस्य तु गेहस्य विस्तारः पञ्चयोजनः ॥८३
पञ्चयोजनमायामः समावरणतः स्थिति ।
एवमन्यविदिक्षु स्युस्सर्वत्र प्रियकद्रुमाः ।
निवासनगरी सेयं श्यामायाः परिकीर्तिता ॥८४

रौप्य शाल के अन्तराल में सात योजनों के विस्तार वाला हेम शाल कहा गया है जो पूर्व की ही भाँति द्वारों से शोभित है ।७८। उन दोनों के मध्य में भूमि जो थी वह ऐसी बतलायी गयी है कि उसमें कदम्बों के द्रुमों की वाटिका बनी है। उसमें परम दिव्यनीपों के वृक्ष हैं जो दो योजन ऊँचाई वाले हैं ।७९। वे सदा ही मदिरा का स्पन्दन करने वाले हैं और मेदुर प्रसवों से परम उज्ज्वल हैं। जिनसे कादम्बरी नाम वाली योगिनी भोग देने वाली है ।८०। वह विशेषता से युक्त मदिरोद्याना वाटिका मन्त्रिणी देवी की निरन्तर प्रिया है। वे नीपों की वृक्षावलियाँ छाया वाली तथा सुरम्य पत्र और पल्लवों से समाकुल रहा करती हैं। उसकी सुरम्य सुगन्ध से परम चञ्चल भ्रमरों की झंकार हुआ करती है जिससे उसका मध्य भाग भरा हुआ रहता है ।८१। वहाँ पर ही मन्त्रिणीनाथा का एक बहुत मनोहर मन्दिर है। कदम्बों के वन की वाटिका के विदिशाओं में ज्वलनादि से युक्त है ।८२। उस जादि