वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya
भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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सूत्र विषय पृष्ठ
चौथा पाद
१-२ सांख्योक्त प्रकृतिकी अवैदिकताके प्रसंगमें 'अव्यक्त'
शब्दपर विचार और उसके शरीरवाचक होनेका कथन...... १११-११३
३-५ वेदोक्त प्रकृति स्वतन्त्र और जाननेयोग्य नहीं, परमेश्वरके
अधीन रहनेवाली उसीकी शक्ति है, इसका प्रतिपादन....... ११३-११५
६-७ 'अव्यक्त' शब्द प्रकृतिसे भिन्न अर्थका वाचक क्यों है?
इसका युक्तिपूर्ण विवेचन........................................ ११५-११७
८-१० श्रुतिमें 'अजा' शब्द परब्रह्मकी शक्ति विशेषका बोधक है,
सांख्योक्त प्रधानका नहीं, इसका प्रतिपादन............. ११७-१२०
११-१३ 'पञ्च-पञ्चजनाः'शब्दसे सांख्योक्त प्रकृतिके पचीस तत्त्वोंका
श्रुतिमें वर्णन किया गया है, इस मान्यताका खण्डन....... १२१-१२३
१४-१५ आकाश आदिकी सृष्टिमें ब्रह्म ही कारण है तथा उस
प्रसंगमें आये हुए 'असत्' आदि शब्द भी उसीके वाचक
हैं इसका समर्थन........................................... १२३-१२५
१६-२२ कौषीतकि श्रुतिमें सोलह पुरुषोंका कर्ता एवं ज्ञेयतत्त्व
ब्रह्मको ही बताया गया है, जीव, प्राण या प्रकृतिको
नहीं, इसका सयुक्तिक उपपादन........................... १२६-१३१
२३-२९ ब्रह्मकी अभिन्न निमित्तोपादान कारणताका निरूपण....... १३१-१३७
दूसरा अध्याय
पहला पाद
१-११ सांख्योक्त प्रधानको जगत्का कारण न माननेमें
सम्भावित दोषोंका उल्लेख और उनका परिहार............ १३८-१४६
१२ अन्य वेदविरोधी मतोंका निराकरण........................... १४६
१३-१४ ब्रह्मकारणवादके विरुद्ध उठायी हुई शंकाओंका समाधान.... १४६-१४९
१५-२० युक्तियों और दृष्टान्तोंद्वारा सत्कार्यवादकी स्थापना एवं
ब्रह्मसे जगत्की अनन्यता.................................... १४९-१५२