वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya
भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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सूत्र विषय पृष्ठ
२१—२३ उक्त अनन्यतामें सम्भावित ‘हिताकरण’ आदि दोषोंका
परिहार.......................................................... १५२—१५६
२४-२५ ब्रह्मके द्वारा संकल्पमात्रसे बिना साधन-सामग्रीके ही
जगत्की रचनाका कथन......................................... १५६—१५८
२६—२८ ब्रह्मकारणवादमें सम्भावित अन्यान्य दोष तथा श्रुति-
विरोधका परिहार................................................ १५८—१६०
२९-३० सांख्यमतमें दोष दिखाकर ग्रन्थकारद्वारा अपने
सिद्धान्तकी पुष्टि................................................. १६१-१६२
३१—३३ कारण और प्रयोजनके बिना ही परमेश्वरद्वारा संकल्प-
मात्रसे होनेवाली जगत्की सृष्टि उनकी लीलामात्र है—
इसका प्रतिपादन.............................................. १६३-१६४
३४-३५ ब्रह्ममें आरोपित विषमता और निर्दयता दोषका
निराकरण....................................................... १६५-१६७
३६-३७ जीवों और उनके कर्मोंकी अनादि सत्ताका प्रतिपादन
तथा ब्रह्मकारणवादमें विरोधके अभावका कथन............ १६८—१६९
दूसरा पाद
१-१० अनेक प्रकारके दोष दिखाकर सांख्योक्त प्रधान
कारणवादका खण्डन........................................... १७०—१७७
११-१७ वैशेषिकोंके परमाणुकारणवादका निराकरण............... १७८-१८४
१८-३२ बौद्धमतकी असंगतियोंको दिखाते हुए उसका खण्डन..... १८४-१९६
३३-३६ जैनमतमें पूर्वापरविरोध दिखाते हुए उसका खण्डन....... १९६-१९९
३७-४१ पाशुपतमतका खण्डन............................................ १९९-२०२
४२-४५ पांचरात्र आगममें उठायी हुए आंशिक अनुपपत्तियोंका
परिहार........................................................... २०२-२०५
तीसरा पाद
१-९ ब्रह्मसे आकाश और वायुकी उत्पत्तिका उपपादन करके
ब्रह्मके सिवा, सबकी उत्पत्तिशीलताका कथन............. २०६-२११