बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)
Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनेकवर्णसमीकरणम् । ८१
या ०+का ०+नी ०+पी ०+रु १०० । इदमन्यत् समीकरण च जातम्।
तत समच्छेदादिना जाते यावत्तावदुन्मिती या=का १ नी १ पी १ रु १००
का १४७ नी १३५ पी ३५ रु १०५००
या= ---------------------------------
१०५
अनयोश्छेदगमेन जातौ पक्षौ
का १०५ नी १०५ पी १०५ रु १०५००
का १४७ नी १३५ पी ३५ रु १०५००
नी ४० पी १४० रु ७०००
समशोधनेन कालकोन्मिति का= ------------------------ (१)
२८
ना १० पा ३५ रु १७५०
( १ ) वि०ज्ञा०— = ------------------------ अत्र "अन्येऽपि भा-
७
ज्ये—" इत्यतो नीलकरपीतकयोरन्यतरस्य व्यक्तमानकल्पनमुचितम् । तत्र पूर्वं
कल्पित पीतकसम-निरवयवमयूरमूल्यलब्धा मयूरा आपि निरवयवा शतान्त
र्वर्त्तिनस्त्रिगुणिताङ्क समाना एव । अथ 'शतेन शतमानय' इति नियमात् त्रिंश
त्सम पीतकमाने कल्पितेऽसगतिरत पा=३३ तदा
नी १० ( रु ३३ X ३५ ) रु १७५० नी १० रु ५९५
का = --------------------------------- = ---------------- अत्र 'क्षेपा-
७ ७
भायोऽथ वा यत्र क्षेप शुद्धेद्भरोद्धृत ।" इत्यतो वल्ल्यादिविडम्बनां विनैव
लब्धिगुणी ८५ । ० वा { ल=रु ८५ । } संक्षेपौ { लो १० रु ८५ = का । } अत्र षट्पर्यन्त
{ गु=रु ० } { लो ७ रु ० = नी । }
लोहितकमाने कल्पितेऽसगतिरतो यदि लो = ७ तदा { का = १५
{ नी = ४९
{ पी = ३३
उत या = ३ ( १ ) । यदि लो = ८ तदा { का = ५
{ नी = ५६
अत या = ६ ( २ ) । { पी = ३३
नी १० रु ४९०
अथ यदि पी = ३६ तदा का = -------------- अत
७
का = लो १० रु ७० । अत्र यदि लो = १ तदा { का = ४०
नी = लो ७ रु ० । { नी = २१
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