बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजीवनचरित्र । (७)
शवरायजी अन्य स्थानसे ब्रजसेवनके लिये आवसे थे और
ब्रजमेंही कविवर विहारीलालका जन्म हुआ जिसकारण उ-
नके सब आचार विचार ब्रजभाषा सब ब्रजवासियोंकी ही स-
मान थी. अब इस बातका विचार करना है कि, कविप्रिया
रसिकप्रिया रामचन्द्रिकादि प्रसिद्ध ग्रन्थोंके निर्माता कविवर
केशवदासजीही इनके पिता थे और इसीकारण उनको सनाढ्य
ब्राह्मणमिश्र कहाजाय तो यह भी युक्तिसंगत बोध नहीं
होता, कारण कि, टिहरीनिवासी कविवर केशवदासजीका
शरीर लगभग १६७० संवत्में पात होगया था गोस्वामी
तुलसीदासजीसे पहिलेही यह मृतक होगये, अर्थात् ओडछा-
धीश राजा इन्द्रजित्के अभिचारसे समाजसहित प्रेतयोनिको
प्राप्त होगये ।
इनके निर्मित ग्रन्थोंकी अधिकाईसे विदित होता है कि,
इनकी अवस्था साठ सत्तर वर्षकी होगी यदि कविवर विहा-
रीलाल तीस वर्षकी अवस्थामें उत्पन्न हुए हों तो भी सतसई
निर्माणसमय उनकी अवस्था सत्तर वर्षके लगभग होनी चा-
हिये परंतु सतसई देखनेसे साफ विदित होता है कि, सतसई
का निर्माण पूर्ण युवावस्थामें हुआ है, सतसईके रसलि भाव
देखनेसे उस समयतक सतसईकारकी अवस्था तीसवर्षकी
कदाचित् न हुई हो, और केशवदासजीकाभी ब्रजवास
प्रसिद्ध नहीं है इस कारण इन केशवदासजीके पुत्र कविवर