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बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

श्रीः ।
कविवर बिहारीलालजीका-
जीवनचरित्र ।
भारतवर्षमें यद्यपि भाषाके अनेक कवि हुए हैं परन्तु
बिहारीलालकी सतसईभी कविताका एक अनुपम भंडार है
कौन ऐसा रसिक है कि, जिसका चित्त इनके दोहोंको श्रवण
कर एक बारही रसमयपूर्ण न होजाय स्वयं कविने कहा है ।
दोहा-सतसैयाके दोहरे, ज्यों नावकके तीर ॥
देखतके छोटे लगैं, घाव करैं गम्भीर ॥ १ ॥
ब्रजभाषा बरणी कविन, बहुविधि बुद्धिविलास।
सबकी भूषण सतसई, करी बिहारीदास॥ २ ॥
और इसमें कुछभी सन्देह नहीं कि, सतसईमें यही गुण
है इस समयकी प्रथाके अनुसार बिहारीलाल कवीश्वरका
समय जाति कुल गोत्रका परिचय पाये बिना पाठक सन्तुष्ट
नहीं होंगे इस कारण इसमेंभी कुछ परिश्रम कर यथाशक्ति
पाठकोंके सन्मुख इनका परिचय उपस्थित करते हैं इनके
समयका निर्णय करनेमें तो कुछ आपत्ति नहीं पडती कारण
कि, स्वयंही कविवरने कहा है ।