बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४ ) भूमिका ।
है, "साहित्य परिचयसे काव्यलक्षण रसनिरूपण नायिका-
भेद अलंकारादिका ज्ञान पाठकोंको सहजमें होजायगा"और
इससमयकी परिपाटीके अनुसार यथामिलित विहारीदासका
जीवनचरित्र भी लिखदिया है ।
टीका करते समय हमने कई सतसई सन्मुख रक्खीं परन्तु
एकका क्रम एकसे नहीं मिलता, तथा पाठभेदभी बहुत है
इस कठिनाईके दूर करनेके निमित्त आज़मसाही संग्रहके
अनुरूपलल्लूजीलाल संगृहीत दोहोंका अनुसरण करके इस
टीकेको निर्माण किया है ।
विहारीलालकी सतसई क्रमसे निर्मित नहीं हुई, यह एक
भिन्न क्रमका ग्रंथ है। इसीकारण इसमें नायिकाभेदादिका क्रम
अन्यग्रंथोंके अनुसार नहीं है और यही कारण है कि, दो-
होंका एक दूसरेसे अधिक सम्बन्ध नहीं मिलता ।
जितने प्राचीन टीकेहैं उन टीकोंमें साहित्यविषयक कोई त्रुटि
नहीं है बहुत उपयोगी है परन्तु भावार्थ अक्षरार्थ जाननेके लिये
पाठकोंको यह अतिउपयोगी होगा ऐसी मुझे दृढ आशा है ।
इसप्रकार प्रबन्धोंसे इस ग्रंथको अलंकृत कर अपने परम
माननीय जगद्विख्यात वैश्यवंशादिवाकर "वेंकटेश्वर" यन्त्राल-
याध्यक्ष सेठजी श्रीयुत्क्षेमराज श्रीकृष्णदासजी महाशयके
करकमलमें सब प्रकारके स्वत्वसहित समर्पित करदिया है; जि-
न्होंने सबप्रकार कृतकार्य कर हमको सदैव उत्साहित कियाहै।
यथासाध्य दोहोंको शुद्ध कर सन्निवेशित कियाहै इसपरभी
यदि कहींअशुद्धि रहगईहो तो पाठकगण क्षमाकरेंगे कारणकि,