बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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प्रशंसा।
दोहा।
सतसैयाके दोहरा, ज्यों नावकको तीर।
देखतके छोटे लगैं, बेधैं सकल शरीर ॥ १ ॥
सतसईके दोहे नावककेसे तीर हैं देखनेके छोटे लगते हैं
परन्तु सब शरीर वेधते हैं ॥ १ ॥
ब्रजभाषा वरणा कविन, बहुविधि बुद्धिविलास।
सबकी भूषण सतसई, करी विहारीदास ॥ २ ॥
यद्यपि कवियोंने अपनी बुद्धिके अनुसार अनेकविधि
ब्रजभाषाका वर्णन कियाहै परन्तु विहारीदासने सबकी
भूषण सतसई निर्माण की है ॥ २ ॥
करे सातसै दोहरा, सुकवि विहारीदास।
सबकोऊ तिनको पढ़ैं, गुणैं गुणेश विलास ॥ ३ ॥
सुकवि विहारीदासने सातसौ दोहे निर्माण किये उनके
पढ़नेसे गुणनकरनेसे सुख होता है ॥ ३ ॥