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सर्वकोश
बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

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पृष्ठ 18

जीवनचरित्र । ( १७ )
मोहिं तुम्हें बाढी बहस, को जीते यदुराज।
अपने २ विरदकी, दुहूँ निबाहन लाज ॥
आगे कितने समयतक कविवर इस संसारमें रहे सो
विदित नहीं होता सतसई क्रमानुसार नहीं लिखीगई यह
फुटकर दोहे भिन्न समयमें भिन्न २ विषयक कथन हुए हैं
पीछे जब ग्रन्थ दुर्लभसा होने लगा तब रसिकजनोंने अपनी
इच्छानुसार इसको शृंखलाबद्ध किया और किसी किसीने
टीकेभी निर्माण किये यद्यपि इसपर बीस पच्चीस टीका हुई हैं
परन्तु प्राचीन टीकाओंमें सूरतमिश्रकी टीका सराही-
जाती है ।
यद्यपि कविवरका पूर्ण वृत्तान्त अलभ्य हे परन्तु इसके
न मिलनेसे कोई विशेष क्षति नहीं है उनका एक दोहाभी
जबतक भूमण्डलमें रहेगा तबतक उनका गौरव और
कीर्त्ति संसारमें विद्यमान रहेगी इसकारण अधिक विस्तार न
करके इतनेहीमें कविकी जीवनी पूर्ण करते हैं ।
पण्डित-ज्वालाप्रसादमिश्र.