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बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

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पृष्ठ 15

( ५४ ) बिहारीलालजीका-
ऐसे गुणवान् पिताको मारडालनेका विचार ! दुःखकी बात है
कि, पाखण्डी कीरतसिंहने इस भयानक दुष्कर्मको करना
स्वीकार किया और अफीमके साथ विष मिलाकर महाराजको
भक्षण कराया, परन्तु इस पितुघाती पाखण्डीको वादशाहने
भी धोखादिया, केवल एक कामता नामक जनपद इस
कुलांगारके हाथ आया ।
जिस दिन राक्षसपुत्रकी विश्वासघातकता और नृशंसतासे
राजपूतगौरव महाराज जयसिंह इस लोकको छोड़गये,
उसही दिन अम्बग्के भाग्याकाशमें एक गंभीर काला मेघ
छागया, उसके साथही कुशावहकुलकी गौरवगरिमा प्रभा-
हीन होगई फिर वह गंभीर मेघ लोप नहीं हुआ जिन कुशावह
राजाओंके प्रचण्डप्रतापसे एक समय दिल्लीका सिंहासन
कम्पायमान होगया था उनके वंशधरोंने फिर उस प्रदीप्त गौ-
रवको प्राप्त नहीं किया मानों आजतक उस वधका प्रायश्चित्त
पूर्ण नहीं हुआ है ।
सम्वत १७२४में जब इस प्रकार जयशाहका शरीर पात
हुआ और उनके दायाद ※ रामसिंह और कृष्णसिंहने राज्य