भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)
Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary
महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषय सूची
(अ) पश्चिम खंड
आमुख
१. भरत के पूछने पर लक्ष्मण द्वारा रामभक्ति की महिमा तथा प्रवर्तन-
परम्परा का वर्णन १-३
२. राम-सीता की प्रमोदवनलीला के समय लक्ष्मण की रक्षासेवा तथा वरप्राप्ति ४-६
३. भरत के प्रश्न पर लक्ष्मण द्वारा ज्ञान-भक्ति का स्वरूप निरूपण ७-८
४. प्रमोदवन-शोभा-वर्णन ९
५. प्रमोदवन-विहारी राम के अवतार ग्रहण के कारण, हिरण्याक्ष-हिरण्यक-
शिपु-वध; रावण का शिवाराधन, वर प्राप्ति तथा कैलाश उठाने का
प्रयास, नन्दीश्वर का शाप देना १०-१३
६. राम-जन्मोपाख्यान १४-१६
७. सीताजन्मोपाख्यान १७-१९
८. सीता की अष्ट नित्यसखियों का नदीरूप मे मिथिला मे अवतरण १९--२३
९. त्रियुगा की प्रादुर्भावकथा २३-२५
१०. कमलेश्वरी की प्रादुर्भावकथा २५-२९
११. गण्डकी की प्रादुर्भावकथा ३०-३१
१२. अघवारा की प्रादुर्भावकथा ३२-३३
१३. द्युम्ना की प्रादुर्भावकथा ३४-३६
१४. घोषवती की प्रादुर्भावकथा ३७-४०
१५. वनघोषा की प्रादुर्भावकथा ४१-४२
१६. स्वयं लक्ष्मी की प्रादुर्भावकथा ४३-४५
१७. कौशिकी की प्रादुर्भावकथा ४६-५१
१८. सीता जन्मोत्सव ५२-५९
१९. सीता जन्म के अवसर पर महादेव द्वारा स्तुति ५९-६१
२०. सीता जन्म के अवसर पर इन्द्र द्वारा स्तुति ६१-६३
२१. सीता जन्म के अवसर पर अग्नि द्वारा स्तुति ६३-६४
२२. यम कृत जानकी स्तुति ६५-६७
२३. निर्ऋति कृत जानकी-स्तुति ६७-६९
२४. वरुण कृत जानकी-स्तुति ६९-७१
२५. वायु कृत जानकी-स्तुति ७१-७३
२६. कुबेर कृत जानकीस्तुति ७४-७५
२७. सीता जन्मोत्सव के अवसर पर मिथिला का अलंकरण ७५-७६