भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)
Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary
महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १० )
३४. अयोध्यावासियों के प्रस्थान के पश्चात् राम द्वारा समागत गोपवृंद का
प्रबोधन और उन्हें प्रमोदवनलीला मे परिकररूप मे स्थान देने का
समाश्वासन ३७९-३८०
३५. ख्रिग नामक अन्त्यज के उद्धार की कथा ३८०-३८७
३६. रामराज्य की सुव्यवस्था एवं सम्पन्नता का वर्णन, राम तथा उनके तीनो
भाइयों के पुत्रों की विभिन्न प्रदेशो में राज्य संस्थापना और चिरकाल तक
धर्मसंस्थापना पूर्वक लोकपालन ३८८-३८९
३७. राम का सरयूतटवर्ती आरामकुंज गमन तथा सीता एवं परिकरों सहित
निवास ३९०-३९१
३८. राम द्वारा दिव्यधाम गमन की घोषणा और साथ चलने के लिये उत्सुक
प्रजावर्ग सहित जीवमात्र को सरयू तट पर आने का आवाहन, राम का
सीता, भ्राताओं, भ्रातृवधुओ, हनुमानादि सेवको, प्रजा तथा कीट
पतंगादि जंतुओ सहित सरयूस्नान के अनंतर दिव्य विमानों द्वारा
प्रमोदवन के लिए प्रस्थान ३९१-३९३
३९. राम के लोकान्तरणोपरात गोप-गोपियों की कालक्षेपव्यवस्था ३९४
४०. ब्रह्मा द्वारा प्रस्तुत ग्रंथ की वक्ता-श्रोता-परम्परा तथा महात्म्य वर्णन ३९५-३९६