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सर्वकोश
भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary

महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

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( ९ )
१९ संतों के लिए तीर्थाटन का महत्व, गृहस्थो की त्रिगुणात्मक कर्मव्यवस्था,
कर्म तथा ज्ञान मार्ग की अपेक्षा भक्तिसाधना का महत्व ३२४-३२५
२०. दुर्वासा के प्रबोधार्थ राम द्वारा अक्षरब्रह्म होते हुए भी भक्तों के परितोष-
हेतु पुरुषोत्तम रूप मे अतरंगा शक्तियों सहित रसमयी लीलाओं के आयो-
जन का औचित्य प्रतिपादन ३२६-३२७
२१. दुर्वासा की प्रार्थना पर राम द्वारा विराट् स्वरूप दिखाना, मुनि द्वारा
स्तुति और राम का पुनः द्विभुज रूप धारण करना, अष्टदशाध्यायी राम-
गीता की समाप्ति ३२८-३३२
२२. विदा होते समय वियोग व्यथा से पीड़ित दुर्वासा को निजधाम प्राप्ति के
साधनों का राम द्वारा उपदेश और आगामी सारस्वत कल्प मे नित्य
लीला मे स्थान देने का आश्वासन ३३२-३३४
२३ प्रेमविह्वल दुर्वासा का अयोध्या से प्रस्थान, राम तीर्थो का पर्यटन,
रामलीलागान, स्थितप्रज्ञ भाव से जीवनयापन तथा महर्षियो का
सत्संग करते हुए सारस्वत कल्प आने पर चन्द्रचूड़ा सखी के रूप मे
नित्यलीला प्रवेश ३३५-३३६
२४. वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम, याज्ञवल्क्य, भरद्वाज, शुकदेव, आंगिरस, मांडव्य,
आपस्तम्ब, शांडिल्य आदि असंख्य मुनियो का सखी रूप में राम सानिध्य
प्राप्ति ३३७-३३९
२५. दुर्वासा के विदा होने पर राम से प्रतिहार रूप मे अपने द्वारा किये गये
आज्ञोल्लघन अपराध के लिए दंड देने की लक्ष्मण की प्रार्थना, राम द्वारा
अवतार लीला का प्रयोजनकथन एवं उसके संवरण की घोषणा के साथ
लक्ष्मण को समाश्वासन ३३९-३५०
२६. राम द्वारा लक्ष्मण से अपने नित्यलीला धाम प्रमोदवन के ऐश्वर्य
का वर्णन और उसमे उन्हे मुख्यपरिकररूपेण ग्रहण करने का
आश्वासन ३५०-३५५
२७. राम से विदा होकर लक्ष्मण का अपने सरयू तटस्थ प्रासाद में गमन और
उद्विग्न-चित्त से लीलाप्रवेशतिथि की प्रतीक्षा ३५६
२८ राम दरबार मे उपस्थित होकर अयोध्या वासियों द्वारा रामचरित, राम-
नाम महिमा तथा राम की प्रकट-अप्रकट लीला का महात्म्य-गान ३५६-३६७
२९. राम द्वारा अयोध्या मे प्राणत्यागने वाले जीवमात्र के गरुड़ारूढ होकर
परमधाम प्राप्ति का रहस्योद्घाटन ३५८-३६०
३०. राम द्वारा अयोध्या तथा सरयू का महात्म्य वर्णन ३६०-३७२
३१. अयोध्यावासी दुष्पीति नामक चाडाल के यमपुरी से उद्धार का वृत्तांत ३७२-३७५
३२. राम द्वारा अयोध्या मे अनुष्ठानीय वर्षोत्सवों का महात्म्यवर्णन ३७६-३७७
३३. राम का अयोध्यावासियों को अपने साथ दिव्य विमानो से परमधाम ले
जाने का आश्वासन, लोकातरण का उद्देश्यकथन और विसर्जन ३७८-३७९