भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)
Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary
महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा
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सौनासीरमणिप्रख्यं प्रकाशं तिमिरोपमम् ।
फुल्लारविन्दपत्राक्षं करुणामृतवर्षिणम् ॥ ५ ॥
पीताम्बरप्रभासप्ततपनीयसुनिर्मलम् ।
गण्डमण्डलसंक्रान्तस्फुरन्मकरकुण्डलम् ॥ ६ ॥
श्रीवत्साङ्कधरोरस्कं महाकौस्तुभभूषितम् ।
रत्नाङ्गदलसद्बाहुस्वर्णकङ्कणभूषितम् ॥ ७ ॥
विशालवनमालाद्यं रत्नग्रैवेयकान्वितम् ।
चूडामणिशिरोभासि नासामौक्तिकभूषितम् ॥ ८ ॥
स्वर्णसूत्रसमालम्बिकिङ्किणीमध्यभूषितम् ।
गम्भीरनाभिललितं त्रिवलीपिहितोदरम् ॥ ९ ॥
रोमराजीसमुद्भासि नीलरत्नच्छविच्छटम् ।
निर्णिक्तमुकुराकारकपोललकसंकुलम् ॥ १० ॥
कदम्बकिंजल्कनिभं कौशेयपरिवीतिमत् ।
षट्कपद्मासनं देवं तत्त्वमुद्राधर हृदि ॥ ११ ॥