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सर्वकोश
भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary

महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

पृष्ठ 103, कुल 423 में से

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पृष्ठ 103

॥ ५ ॥
Wait: "फलप्रसूनपत्रर्द्धिरमणीयकमन्दिरम्"
Letters: फ-ल-प्र-सू-न-प-त्र-र्द्धि-र-म-णी-य-क-म-न्दि-र-म्.
"पत्रर्द्धि" = पत्र + ऋद्धि -> पत्रर्द्धि. Exactly!

Line :
चतुर्विंशतिसंख्याकमुख्यदिव्यवनान्वितम् ।
(Notice the single danda at the end: ।)

Line :
यत्र रत्नाद्रिरुद्भाति रत्नसानुमनोहरः ॥ ६ ॥

Line :
अनेकनिर्झरस्त्राविसुगन्धिजलपूरितः ।
Wait, "निर्झरस्त्रावि..." or "निर्झरस्रावि..."?
In print: निर्झरस्त्रावि (with स्त्रा).

Line :
अनेकरत्नरुचिरो नानाधातुगणश्रयः ॥ ७ ॥
Wait, look at "नानाधातुगणश्रयः":
Is it गणश्रयः or गुणाश्रयः or गणाश्रयः?
Wait, let's look at the print:
ना-ना-धा-तु-ग-ण-श्र-यः
Wait, look at the letter between 'तु' and 'ण': it is 'ग'.
Is there an 'उ' mat