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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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ध्वज-योग
अष्टम भाव में पाप-गृह तथा लग्न में
अन्य शुभ ग्रह हों, तो ऐसा जातक समाज का
नेता होता है।
हंस-योग
पंचम, नवम, सप्तम तथा लग्न—इन
भावों में सभी ग्रह हों, तो ऐसा जातक अपने कुल
को पालने वाला होता है।
चाप-योग
शुक्र तुला में, मंगल मेष में तथा गुरु
स्वराशि पर स्थित हो, तो ऐसा जातक राजा होता
है।
प्रथम चतुःसार योग
यदि सभी ग्रह चारों केन्द्रों में स्थित हों तो
ऐसा जातक महाधनी राजा होता है।