भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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स्वक्षेत्रस्थ ग्रहों का फलादेश
स्वक्षेत्री अर्थात् अपनी राशि में स्थित विभिन्न ग्रहों का संक्षिप्त फलादेश
निम्नानुसार समझना चाहिए। यहाँ प्रदर्शित सभी उदाहरण कुण्डलियां मेष लग्न की
हैं। अन्य लग्नों की कुण्डलियों के विषय में भी इन्हीं के आधार पर जानकारी प्राप्त
कर लेनी चाहिए।
स्वक्षेत्रस्थ 'सूर्य'
स्वक्षेत्रस्थ 'सूर्य'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'सूर्य' स्वक्षेत्री
(सिंह राशि का) हो, वह सुन्दर, सुखी, ऐश्वर्यवान्,
पराक्रमी, व्यभिचारी, निरन्तर उद्योग तथा परिश्रम करने
वाला, धैर्यवान, साहसी, तेजस्वी तथा अत्यन्त उग्रस्वभाव
का होता है।
स्वक्षेत्रस्थ 'चन्द्र'
स्वक्षेत्रस्थ 'चन्द्र'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'चन्द्र' स्वक्षेत्री
(कर्क राशि का) हो, वह सुन्दर, धनी, तेजस्वी, भाग्यवान्,
विनम्र, साधु चरित्र, परोपकारी, दयालु, मनस्वी, यशस्वी
तथा सहृदय होता है।
स्वक्षेत्रस्थ 'मंगल'
स्वक्षेत्रस्थ 'मंगल'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'मंगल' स्वक्षेत्री
(मेष अथवा वृश्चिक राशि का) हो, वह साहसी, बलवान,
यशस्वी, कृषक, भूस्वामी अथवा सैनिक, धनी तथा मध्यम
स्वभाव वाला होता है।