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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 638 में से

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स्वक्षेत्रस्थ 'बुध'
स्वक्षेत्रस्थ 'बुध'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'बुध' स्वक्षेत्री
(कन्या अथवा मिथुन राशि का) हो, वह विद्वान्, बुद्धि-
मान्, सम्पादक, शास्त्रज्ञ, लेखक तथा अनेक कलाओं का
ज्ञाता होता है।
स्वक्षेत्रस्थ 'गुरु'
स्वक्षेत्रस्थ 'गुरु'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'गुरु' स्वक्षेत्री
(धनु अथवा मीन राशि का) हो, वह सुखी, शास्त्रज्ञ,
वैद्य, काव्य-प्रेमी, कवि, विद्वान्, आत्मबली तथा धनवान
होता है।
स्वक्षेत्रस्थ 'शुक्र'
स्वक्षेत्रस्थ 'शुक्र'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'शुक्र' स्वक्षेत्री
(वृष अथवा तुला राशि का) हो, वह विद्वान्, गुणी,
विचारक, धनवान्, स्वतन्त्र प्रकृति का, कृषि-सम्बन्धी
व्यवसाय करने वाला तथा सुन्दर होता है।
स्वक्षेत्रस्थ 'शनि'
स्वक्षेत्रस्थ 'शनि'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'शनि' स्वक्षेत्री
(मकर अथवा कुम्भ राशि का) हो, वह पराक्रमी, कष्ट-
सहिष्णु, उग्र स्वभाववाला, सुन्दर नेत्रोंवाला, यशस्वी
तथा लोकप्रिय होता है।