भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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रखने वाली है। इसके द्वारा जातक के मस्तक के सम्बन्ध में विचार किया
जाता है।
(२) वृष—यह राशि 'स्त्री' जाति, दक्षिण दिशा की स्वामिनी, श्वेत रंग
वाली, कान्ति-हीन, वैश्य वर्ण, स्थिर संज्ञक, शिथिल शरीर, शुभकारक, महा कष्ट-
कारी तथा भूमितत्त्व वाली है। यह स्वार्थी तथा सांसारिक कार्यों में दक्षता एवं
बुद्धिमत्ता से काम लेने वाली है। इसके द्वारा जातक के मुंह तथा कपोलों के सम्बन्ध
में विचार किया जाता है। इसे 'अर्द्ध जलराशि' भी कहते हैं।
(३) मिथुन—यह राशि 'पुरुष' जाति, पश्चिम दिशा की स्वामिनी, हरित
रंग, चिकनी, उष्ण स्वभाव, शूद्रवर्ण, शिथिल शरीर, विषमोदयी तथा महाशब्दकारी
है। यह शिल्पी तथा विद्या-व्यसनी स्वभाव की है। इसके द्वारा जातक के स्कन्ध तथा
बाहुओं के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
(४) कर्क—यह राशि 'स्त्री' जाति, उत्तर दिशा की स्वामिनी, रक्त-धवल
मिश्रित रंग वाली, जलचारी, सौम्य, कफ प्रकृति, बहु सन्ततिवान्, बहुत पाँवों वाली,
रात्रिबली एवं समोदयी है। यह लज्जालु स्वभाव की, समयानुसार चलने वाली तथा
सांसारिक उन्नति के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहने वाली है। इसके द्वारा जातक
के वक्षस्थल एवं गुर्दों के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
(५) सिंह—यह राशि 'पुरुष' जाति, पूर्व दिशा की स्वामिनी, पीले रंग वाली,
क्षत्रिय-वर्ण, उष्ण-स्वभाव, पुष्ट शरीर, पित्त प्रकृति, अग्नि तत्त्व वाली, निर्जल एवं
अल्प सन्ततिवान् है। इसका स्वभाव मेष राशि जैसा है, परन्तु इसमें स्वातन्त्र्य-
प्रियता एवं उदारता अधिक है। इसके द्वारा जातक के हृदय के सम्बन्ध में विचार
किया जाता है।
(६) कन्या—यह राशि 'स्त्री' जाति, दक्षिण दिशा की स्वामिनी, पिंगल
रंग जाती, द्वि-स्वभाव, पृथ्वीतत्त्व वाली, वायु एवं शीत-प्रकृति, अल्प सन्ततिवान्
तथा रात्रिबली है। इसका स्वभाव मिथुन राशि जैसा है, परन्तु यह अपनी उन्नति
एवं सम्मान पर अधिक ध्यान देती है। इसके द्वारा जातक के पेट के सम्बन्ध में
विचार किया जाता है।
(७) तुला—यह राशि 'पुरुष' जाति, पश्चिम दिशा की स्वामिनी, श्याम
रंग की, शूद्रवर्ण, क्रूर-स्वभाव, वायुतत्त्व वाली, शीर्षोदयी, चर-संज्ञक, दिनबली,
अल्प सन्ततिवान् एवं पादजलराशि है। यह स्वभाव से ज्ञानप्रिय, राजनीतिज्ञ,
विचारशील तथा कार्य-सम्पादक है। इसके द्वारा जातक के नाभि से नीचे के अंगों
के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
(८) वृश्चिक—यह राशि 'स्त्री' जाति, उत्तर दिशा की स्वामिनी, शुभ्र रंग
वाली, ब्राह्मणवर्ण, कफ प्रकृति, रात्रि बली, बहु जल तत्त्व वाली तथा बहु सन्ततिवान्