भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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(६) शुक्र—यह ग्रह 'शुभ' संज्ञक, दक्षिण-पूर्व दिशा का स्वामी, श्याम-गौर
वर्ण तथा जलीय तत्त्व वाला है। यह कफ, वीर्य आदि धातुओं तथा काव्य-संगीत,
वाहन, शय्या, कामेच्छा, पत्नी (स्त्री), आँख, वस्त्राभूषण आदि का कारक है। इसके
द्वारा सांसारिक-सुख, व्यावहारिक-सुख, एवं चातुर्य का विचार किया जाता है। यदि
जातक का जन्म दिन में हुआ हो तो इसके द्वारा उसकी माता के सम्बन्ध में भी विचार
किया जाता है।
यह छठे स्थान में निष्फल तथा सातवें स्थान में अनिष्टकर होता है।
(७) शनि—यह ग्रह 'क्रूर' संज्ञक, नपुंसक जाति, पश्चिम दिशा का स्वामी
कृष्णवर्ण, वातश्लेष्मिक प्रकृति का तथा वायुतत्त्व वाला है। इसके द्वारा आयु, शारीरिक
बल, दृढ़ता, ऐश्वर्य, यश, मोक्ष, योगाभ्यास, नौकरी, विदेशी भाषा, विपत्ति एवं मूर्च्छा
आदि रोगों का विचार किया जाता है। यदि जातक का जन्म रात्रि में हुआ हो तो
यह ग्रह माता-पिता का कारक होता है। पापग्रह होने पर भी इसका अन्तिम
परिणाम सुखदायक होता है। यह जातक को दुर्भाग्य एवं संकटों का शिकार बनाने
के बाद उसे शुद्ध एवं सात्विक बना देता है।
यह सप्तम स्थान में बली तथा चन्द्रमा अथवा किसी अन्य वक्री ग्रह के साथ
रहने पर चेष्टा बली होता है।
(८) राहु—यह ग्रह 'क्रूर' संज्ञक, दक्षिण दिशा का स्वामी तथा कृष्णवर्ण
है। यह गुप्त युक्ति-बल, कष्ट एवं त्रुटियों का कारक है। यह जिस स्थान में बैठता है
वहाँ की उन्नति को रोक देता है।
(९) केतु—यह ग्रह 'क्रूर' संज्ञक, उत्तर दिशा का स्वामी तथा कृष्णवर्ण है।
कुछ विद्वान इसे 'शुभ ग्रह' भी मानते हैं। यह गुप्त-शक्ति-बल, कठिन कर्म, भय एवं
त्रुटियों का कारक है। इसके द्वारा जातक के हाथ-पाँव, क्षुधाजनित कष्ट, माता-
मह (नाना) एवं चर्म रोगों के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
राशि : उनका स्वभाव और प्रभाव
कुल राशियां १२ हैं। किस राशि का क्या स्वभाव, प्रभाव है तथा उसके
द्वारा किन विषयों का विशेष रूप से विचार किया जाता है, निम्नानुसार समझ लें—
(१) मेष—यह राशि 'पुरुष' जाति, पूर्व दिशा की स्वामिनी, लाल-पीले
रंग वाली, कान्तिहीन, क्षत्रिय वर्ण, चर-संज्ञक, अग्नि तत्त्व, समान अंग, अल्प-सन्तति
तथा पित्त प्रकृति होती है। यह अहंकारी, साहसी तथा मित्रों के प्रति दयालु-स्वभाव