भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 24, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें२६
है। इसका स्वभाव निर्मल, स्पष्टवादी, हठी, दम्भी तथा दृढ़-प्रतिज्ञ है। इसके द्वारा
जातक की जननेन्द्रिय के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
(९) धनु—यह राशि 'पुरुष' जाति, पूर्व दिशा की स्वामिनी, सुनहरे रंग
वाली, क्षत्रियवर्ण, अग्नि तत्त्व वाली, पित्त-प्रकृति, द्वि-स्वभाव, दिनबली, दृढ़-शरीर,
अल्प सन्ततिवान् तथा अर्द्ध जल राशि है। इसका स्वभाव करुणामय, अधिकार प्रिय
तथा मर्यादा युक्त है। इसके द्वारा जातक के पाँवों की संधि एवं जांघों के सम्बन्ध में
विचार किया जाता है।
(१०) मकर—यह राशि 'स्त्री' जाति, दक्षिण दिशा की स्वामिनी, पिंगल
रंग की, वैश्य वर्ण, पृथ्वी तत्त्व वाली, शिथिल शरीर, वात प्रकृति तथा रात्रिबली
है। इसका स्वभाव उच्चस्थिति का अभिलाषी है। इसके द्वारा जातक के पाँवों के
घुटनों के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
(११) कुम्भ—यह राशि 'पुरुष' जाति, पश्चिम दिशा की स्वामिनी, विचित्र
रंग वाली, शूद्र वर्ण, वायुतत्त्व एवं त्रिदोष प्रकृति वाली, उष्ण-स्वभाव, क्रूर, मध्यम
सन्तति वाली, दिनबली तथा शीर्षोदयी है। इसका स्वभाव नवीन वस्तुओं का
आविष्कारक, विचारशील, धार्मिक तथा शान्त है। इसके द्वारा जातक के पेट के
भीतरी भागों के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
(१२) मीन—यह राशि 'स्त्री' जाति, उत्तर दिशा की स्वामिनी, पिंगल रंग
वाली, ब्राह्मणवर्ण, कफ प्रकृति, जल तत्त्ववाली तथा रात्रिबली है। यह पूर्णतः जल-
राशि है। इसका स्वभाव श्रेष्ठ, दयालु तथा दानशीलता का है। इसके द्वारा जातक
के पाँवों के सम्बन्ध में विचार किया जाता है।
राशियों के स्वामी
विभिन्न राशियों के विभिन्न ग्रहस्वामी माने गये हैं। कौनसा ग्रह किस राशि
का स्वामी है, इसे निम्नानुसार समझना चाहिए—
मेष एवं वृश्चिक—इन दोनों राशियों का स्वामी 'मंगल' है।
१ ८
वृष एवं तुला—इन दोनों राशियों का स्वामी 'शुक्र' है।
२ ७
मिथुन एवं कन्या—इन दोनों राशियों का स्वामी 'बुध' है।
३ ६
कर्क—इस राशि का स्वामी 'चन्द्रमा' है।
४
सिंह—इस राशि का स्वामी 'सूर्य' है।
५