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भोजनकुतूहल: प्रथम भाग (रघुनाथ नवहस्त - आहार-रसायन, पाकशाला-व्यवस्था व विरुद्धाहार)

Bhojanakutuhala of Raghunatha Navahasta

रघुनाथ नवहस्त (सम्पादक: सूरनाड कुंजन पिल्लै) द्वारा

DevanagariSanskritpublished358 पृष्ठ
  • 7
    श्लोकाः पृष्ठम् • श्लोकाः • पृष्ठम्
    59 लघुमन्थे 228
    • 82 लघुरपि रुचि 44
    रक्तो मेध्याहरा• 19 लघुप्रोष्ठी 46
    रक्तो मधूक 162 लघु वर्षोषितं 22
    रक्तो ह्यन्यः 114 लघु वातहरं 124
    रक्तांशा वातला 85 लघु श्लक्ष्णं 134
    रेचनं दीपनं 68 लघुश्च दीपनः 10
    रोचे बाले 151 लध्वजाजं तु 148
    रोचनं ज्वरहरं 66 लक्ष्म्यो बलकरा 35
    रोचनं तुवरं 185 लक्षा रुच्यां 14
    रोचनं दीपनं 111 लड्डुकास्तस्य 48
    रोचनो बृंहणः 50 लतावितान 185
    रोटिका बलकृत् 35 लप्सिका बृंहणी 84
    रोपितारोपिता 3 लवणं शीतलं 120
    रोषितास्तु गवा ,, लवङ्गमरिचोन्मिश्रं 122
    रोचकं तीक्ष्णं • 117 लवङ्गहिङ्गु 53
    रोहितो गर्गरो 172 लवङ्गोशीर 190
    रौक्ष्यं भवति 214 लवङ्गोषण 43
    रौप्ये 129 लवणं तत्र 37
    108 लवणं मधुरं 129
    87 लवणमरिच 87
    रम्भापत्रेऽथवा 214 189
    रम्भाफलं त्यजेत् 212 लवणादिवृतं 83
    रम्भाफल 89 लवणाम्रफल 112
    लकुचः क्षुद्रपनसो 84 लवणार्द्रक 28
    लक्ष्मणा मधुरा 64 • ,, ,,
    लक्ष्माः कृतास्तु 39 लवणेन समायुक्ता 141
    लक्ष्माः पर्पटाः 37 लवलीफल 97
    लघुः कषायो 12 लशुनं षोडशांशं 121
    लघुः पित्तहरो 201 लाक्षारसनिभं 150
    लघु तत्केवलं 111 लाङ्गलो लोह 5
    लघुता हृद्य 213 लाजाः स्युः 22
    लघुत्वदं 94 ,,
    लघुष्णोऽपि 201 लाजाश्च यवचावारण

88
श्लोकाः पृष्ठम् | श्लोकाः पृष्ठम्
लतापुष्पोद्भवं 106 | वलीकाशाः 166
लेपयेच्चन्दनेन 43 | वशावशेश 196
लेह्यव्यापारिकं 236 | वसितावातलवर्णं 117
लोहस्य जन्मप्रभृति ,, | वस्तोर्विचक्षणेनापि 188
लोहपात्रस्थितं 195 | वह्निकृत् कफहृत् 180
लोहितेक्षुश्च मधुरः 156 | ,, 179
वंशत्वचा वापि 121 | वह्निकृत् सर्व्वे 172
वक्रप्रवेशश्च 120 | वह्निकृद्दोषहृत् 153
वक्तव्ये नृपपक्षानु 61 | वह्निदीपनकरं 181
वटकस्य गुणैः 38 | वह्निदीप्तिकरं 128
वडकाः कफ 39 | वह्निवृद्धिकरं 134
वटा वेशवारैः 208 | वह्नेर्मान्द्यकरो 92
वटिका वेशवारस्यापि 42 | वह्नेर्वृद्धिकरं 149
वटेशार्जुन 194 | वंशं करीरं 155
वडोरी तद्गुणा 36 | वाक्यस्य शेषात् 58
वत्साडनी तु 70 | वातकुम्भीफलं 105
वन्ध्यापुत्रोदकी 67 | वातहृत् कफ 19
वन्ध्यीरचिता 35 | वातगुल्म 81
वयःस्थापकं 125 | वातघ्नं कफकृत् 188
वरकोद्दाल 6 | वातघ्नं च 108
वरको मधुरो 20 | वातघ्नं तु 180
वरा शाकेषु 70 | वातघ्नं दीपनं 68
वराहमांसं 171 | वातघ्नं पित्त 97
वर्षासूर्ये 150 | वातघ्नं मधुरं 135
वर्जयित्वा शिवाः 131 | ,, 136
वर्जयेदण्ड 134 | वातघ्नं भेषजजलं 113
वर्ज्यं सर्व्ववर्णं 131 | वातघ्ना पित्तहृत् 85
वर्णकान्तिकरो 3 | वातघ्ना मधुरा 46
वर्णमत्स्यवता 48 | वातघ्ना रोचका 38
वर्ण्यं रुच्याग्निकृद् 111 | वातघ्नाश्च 56
वर्द्धनं वीर्य्यबलभोः 171 | वातघ्नी कफकृत् 35
वर्षादिविधेषु 128 | वातघ्नी पित्त 98
वर्षाम्बुवृद्धौ 69 | वातघ्नी बृंहणी 46
वर्षासु सर्षपं 178 | वातघ्नी सारिका 168

39
श्लोका० | पुटम् | श्लोका० | पुटम् .
वातपित्तकफघ्नं | 120 | वातामं कृमि | 95
वातपित्तकफघ्नन् | 190 | वाताम उष्णः | 102
वातपित्तशमनः | 158 | वाताममञ्जा | ,,
वातपित्तहरं | 194 | वातामयंकरं | 133
,, | 53 | वातामयंकरः | 19
,, | 131 | वातामयबद्धा | 71
,, | ,, | वातामयहरा | 37
,, . | 104 | वातां मांसरुजाः | 221
,, | 111 | वातातिं कण्ठदाहं | 95
,, | 126 | वाताल्पदं | 137
,, | 194 | वाताल्पदाः | 25
वातपित्तहरा | 54 | वार्तेऽम्लं | 144
वातपित्तामयान् | 109 | वाते हितं | 120
वातपित्तोत्थ | 68 | वातोदरी | 145
वातप्रकोपनः | 90 | वान्तिकृद्वात | 71
वातप्रकोपनाः | 10 | वान्तिघ्नं | 78
वातलं बद्ध | 185 | वान्तिविद्मूर्च्छादिं | 63
वातलं बातकोपे | 203 | वापिता मधुरा | 3
वातलः कफदो | 16 | वाष्पं वारि | 185
वातलः श्लेष्म | 31 | वामदिश्यायां | 221
बातलो रक्तशमनः | 62 | वाराहं शाविभा | 198
बातश्लेष्मकरो | 67 | वाराही तिक्त | 63
वातश्लेष्मज्वर | 113 | वारिजो गिलल | 20
वातश्लेष्मप्रशमनं | 227 | वारिणा कोमळो | 31
वातश्लेष्मविवन्ध | 111 | वारि स्फाटिक | 178
वातश्लेष्महरं | 193 | वार्त्ताकी कट्टका | 86
" | 169 | वार्त्तिकं नूतनैः | 193
वातश्लेष्महरा | 41 | वास्तुकं तु मधुरं | 66
वातहृत् कफहृत् | 154 | वास्तुकाद्वितयं | ,,
वातहृत्तेऽपि | 202 | वास्तुकसिद्धार्थं | 205
वातहृद् दीपनी | 70 | बालुकी मधुरा | 79
वाताटोपं | 173 | विकण्टकः कषायः | 99
वातादिदोष | 82 | विकाराः फाणित | 161
वातानुलोमी | 32 | |

श्लोकाःसंख्याश्लोकाःसंख्या
विचार्य मधुरं99विपाके मधुरं138
विचिरे जीवतुं186विषमग्रभेदिनः87
विजोद्वमतिः197विषमध्याहन्”
विजातश्च190विषमध्याध्याय118
विज्ञातव्यंस्वभावः196विषेरि मुशमं127
विज्ञेया रोहिणी100विषधं वक्त्रे216
विज्ञेया वेत86विषज्येते224
विद्मवेदिव हव्यं64विषदं शुद्धिः199
विन्दुषामश्व159विषद्वयपि197
विन्दुप्राशन191विषद्रुमसङ्गं”
वितस्तारत्निकं182विषध्यते यह”
वितस्तिमात्रः174विरेऽवान्ति225
विदम्यानिस्सह226विरेचने स्यात्100
विदलति मुख44विरोच्यपि न199
विदारी मधुरा63विलेपी ग्राहिणी57
विदार्ये भूमि184विलेपी च यवः26
विदाहि कटुकं60विलेपी तर्पणी”
विदाहि कफ116विवर्त्त विरतं134
विदाहिनः पुंस्55विवर्णास्त्विन्द्र223
विदाहिनस्तैल54विवृत्याऽग्नेऽस्य174
विदाहि पिच्छल117विशदं रोचनं97
विदाहि यड186”96
विदाहीन्यम्लपानानि123विशिष्ठो मग्न53
विदाह्यामो न्नियंत्वं220विशिष्ठो मुद्र51
विदाह्यम्ने रवे33विशुष्का वटका87
विदाह्य वटकाकारं65विशुष्कम्लंगं217
विद्या पूर्ण220विशेषतः प्रमेह116
विद्यापि चोपयोगेन201विशेषात्पर्षणी168
विद्या घोषाण्डजं218”167
विद्या सुहास्यं29विशेषात् पक्वयं88
विन्ध्याद्री विजया100विशेषात् पक्वां197
विपचेत् क्वाथयेत्27विशेषाद्विषत38
विपरीतो गुरुः57विशेषाद्दारुकं81
विपाके मधुरं188

41
श्लोकाः पृष्ठम् श्लोकाः पृष्ठम्
विषाग्निवापि 202 वृष्यं दीपन 182
विषह्रदः श्याम 196 वृष्यं बृंहणं 128
विषहृत्पान्त 224 वृष्यं मेदःकरं 136
विषहृद्धात्री 212 वृष्यं वर्णकरं 104
विषभूताश्चि 64 वृष्यं स्वादुतरं 77
विषमूत्रपुरीषवात 220 वृष्यः पित्तानिलं 96
विषगोमयं 90 वृष्यः शीतो 7
189 वृष्यः श्रमहरो 11
विषव्रणभ्रान् 4 वृष्यः सन्तर्पणो 80
विषभ्रमानिल 214 वृष्यः स्थौल्यकरो 8
विषसाम्यगुणत्वात् 155 वृष्ययोगैः 167
विषस्य तैजस्य ,, वृष्यश्च पित्तघ्न 156
विष्टम्भिनी न 36 वृष्यश्च मेधास्वर 61
विष्टम्भिनी हरेत् 30 वृष्यश्च रोचनः ,,
विष्टम्भिनो ज्वर 47 वृष्यश्च वीर्यवृद्धिं 94
विष्टम्भि बृंहणं 90 वृष्याः पैत्तं पित्त 50
102 वृष्या क्रिमिहरा 80
वि रुच्य 82 वृष्या क्षतक्षीण 163
विष्णुक्रान्तस्तु 63 ,, 161
विष्णुरता यथैव 218 वृष्या युतिबलप्रदा 160
विशं च रोचनं 178 ,, 164
वीराग्रंणो निशि 222 वृष्या रोचन 45
वीर्यं कफकरं 195 वृष्या वातप्रदा 81
वीर्यप्रण 112 वृष्याश्च रोचना 5-
वृक्षवाटमुवं 70 वृष्या सन्तर्पणी 70
वृक्षायाः कफहृत् 127 वृष्यो रक्तघ्न 157
वृद्धिं करोति 150 वृष्यो रुचिप्रदो 9
वृन्ताकं खण्डितं, 109 वृष्यो रुच्यो 75
वृन्ताकं पित्तल 87 वृष्यो विदाह 164
वृष्यं चकोरजं 172 वेल्लयेद्वेलनेन 44
वृष्यं दाहश्रम * 78 वैशाखे नैर्ऋतं 186
व्यङ्गवलीपलितघ्नं 191
1081

• श्लोकाः • | पुटम् | श्लोकाः • | • पुटम्
व्यञ्जनान्याशु | 196 | शर्करामरिचोन्मिश्रै | 122·
व्यञ्जनालङ्कृतिः | 73 | शर्करामरिचोपेतं | 145
व्याधि च काले | 226 | एतानि | 142
व्यायामश्रान्त | 132 | | 141
व्यायामस्निग्ध | 199 | शर्करेक्षुविकाराणां | 165
व्यायामिनां वात | 188 | ” | 162
व्रणकण्डूति | -72 | शर्करोदकं | 122
व्रणकण्डूहरं | 194 | शर्करोदकसंयुक्तं | 123
व्रणकीटादि | 71 | शल्कं स्थूलं | 174
व्रणदोषा | 81 | शशमांसं | 171
व्रणशोधनसन्धान | 167 | शशेकुन्द | 145
व्रणाक्षिरोग | 57 | शष्कुला मधुरा | 46
व्रीहिगार्ते | 5 | शस्यते बाढ | 148
व्रीह्यादिकं | 2 | शस्यते स्वर | 54
शकुनाहृतशालिः | 6 | शाकं चतुर्विधं | 58
शक्तिमहं | 58 | शाकं मिनत्ति | 59
शङ्खपाल¹ इति | 43 | शाकं षड्विध | ”
शङ्खस्य चूर्णेन | 207 | शाकवाम्बव | 134
शणस्त्वम्ल | 71 | शाकभेदा | 86
षण्डकी राजिका | 125 | शाकानि सर्वाणि | 206
शतदुर्विपाच्या च | 181 | शाके रूक्षतरौ | 69
शतपत्राम्बु | 188 | शाकेषु सर्वेषु | 59
शतपुष्पादलं | 68 | शाको जलाम्बिते | 75
शतावर्येङ्कुराः | 77 | शातपर्वकनेपाल | 156
शताह्वा कटुका | 115 | शारदो वाव | 9
शमयति बहु | 56 | शार्करं कथ्यते | 168
शमीफलं तु | 115 | शालबस्तृणाः | 24
शरद्ग्रीष्म | 136 | शालयो दग्ध | 2
शरत्पयोद | 178 | शालयो मधुराः | ”
शरदृतौ निसंरजः | 175 | घृतं | 44
शर्करां च पचेत् | 121 | शालिपिष्टदधि | 40
शर्करा उदरपित्त | 160 | शालिपिष्टो गरीयः | 201
| 164 | शालीनां लोहितः | 211
• शर्करा भातकं | 168 | शाल्मलीपुष्पं | 107

43
• श्लोका• पृष्ठम् • श्लोका• : पृष्ठम्
शाल्यूनं चेन 178 शीतः कषायो 8
शिखिकण्ठाभ . 197 शीतः पित्तविनाशनः 228
शिग्रुतैलं कटूष्णं 153 शीतकाले 145
शिग्रुपत्रभवं 66 शीतलं निर्मलत्वं च 187
शिग्रुपुष्पं गुरु 82 शीतपित्तान्न 97
शिग्रुमूलस्य 121 शीतलं कान्तिदं 158
शिग्रु रक्तं कटु 82 शीतलं शीघ्रपाकि 104
शितातेक 209 शीतलं श्लेष्मलं 111
शिम्बीधान्ये 211 ,, 228
शिम्बीनिगूढम् 2 शीता तिक्ता कटुः 114
शिम्बीभवं गुरु ,, शीता पित्तास्रं 93
शिम्बीषु माषान् 211 शीताम्बु पीत्वा 210
शिरःस्तम्भाग्न 119 शीताम्बुपूरित 192
शिराकोशातकी 81 शीतकाज्वरहृत् 215
शिरोमध्यतलानां 119 शीतिवारिशितिबरः 75
शिरोमध्ये तलं ,, शीते न तु तदायन्ते 202
शिलाकीर्णं स्वयं 185 शीतोदकं च 209
शिलायां वा 177 शीतोदनं 27
शिलायां साधु 36 शीतो रुच्यः 174
,, 123 शीतोष्णतोयासव
शिशिरं कटु 153 शीतोष्णा शुकदा 52
शिशिरः पित्त 64 शुककृत् कफकृत् 162
शिशिरकिरण 139 शुकनिद्रा 147
शिशिरा वात 70 शुक्लस्तक 37
शिशिरा वातळा 16 शुक्लाग्निनाशकं 84
शिशिरा श्वास 93 शुकवृद्धिकराः 46
शिशिरो मधुरो 9 शुक्लस्तिलः 16
शिशूनां युवां वा 4 शुक्लाङ्गः 174
शीघ्रजन्म तथा 22 शुक्ला तिक्ता 79
शीतं वर्णं 147 शुण्ठिः कटूष्णा 116
शीतं श्लेष्मं च ,, शुण्ठ्याक्त 208
शीतं शिग्रुफलं 82 शुण्ठी यतीकस्य च 207
शीतं स्वादु 180 शुद्धग 35
शीतं हारीतकीतैलं 153 शुद्धसार्थं तन् 58

44
-श्लोका०- पृष्ठम् श्लोका०
शुद्धमांसं परं 52 शेषं मांसरसं
शुद्धमांसाविधानेन 53 शैत्यप्रसाद
शुद्धस्फटिकसन्निभा 164 शैलजे मृन्मये पात्रे
" 160 शैलसाबुसवारि
शुद्धेऽर्धपक्वे 30 शोषस्य नारिकेलस्य
शुद्धेस्तुम्बे 28 शोषस्यापि बलं परं
शुभ्रे पट्टे च 141 शोषपाण्डुहरं बल्यं
शुष्कं कुस्तुम्बरी 73 शोषपाककरो
शुष्कं विरुद्धं 217 शोषोदराक्षौ
शुष्कगोधूम 35 शोषघ्नस्तर्पणो
शुष्कमूशे 13 शोषहृत्सर्पणी
शुष्कवार्ताक 114 शोणितोऽतिहितः
शुष्काः करतल 39 शोषे नवज्वरे
शुष्काः क्षीरेण 30 श्यामाकनीवार
शुष्काश्च वटकाः 38 श्यामाको मधुरः
शूककेषु वरः 6 श्यामा पीता
शूकधान्येषु 211 श्रमक्लमह्रं
शूकोद्भवं लघु 2 श्रमघ्नं बृंहणं
शूलबन्धोदरान् 116 श्रमतृष्णापहं
शूलाजीर्ण 124 श्रमदाह
शूलाजीर्णविबन्ध 95 श्रमभ्रममदा
शूलानाहार्शसां 108 श्रमवैवर्ण्यजित्
शूलामशमन 117 श्रमे कृशे
शूलांशशोष 71 श्रवणपूरण
शूलोदावर्त्त 125 श्रीगुरोः पाद
शूल्यं बल्यं 53 श्रीपर्णी
शृङ्गवेरं सलवणं 108 श्रीमत्तो कटकाम्ब्जा
शृङ्गवेररस एव 207 श्रीवारकः शुचिपत्र
शृङ्गाटकं समितया 53 श्रेष्ठमीषद्धरिद्राभं
शृङ्गाटकः शोणित 65 श्रेष्ठाः शुचिस्खली
शृङ्गाटाकृतिकान् 43 शृङ्गवेरं त्रिदोषघ्नं
शृङ्गारवीरसम्बद्धाः 225 " : पिष्टो
शतधौतं त्रिदोषघ्नं 131 ' पटे
शूर्ते तु माहिषे 121 श्लेष्मघ्नं पित्त

45
• श्लोका• | पुटम् | • श्लोका• | .. पुटम्
श्लेष्मजस्य | 228 | बहिष्पावरजः | • 5
'श्लेष्मघ्नी कृमिजित् | '111' | संक्षेप एषो• | 226
श्लेष्मलं सह | 85 | समावसद्दशा | 43
श्लेष्ममेद | 228 | संयुक्ता सूप | . 31
श्लेष्मकं गुरु | 149 | संशूलानाह | 96
श्लेष्मलः कटुकः | 67 | 'संसेव्यन्तु | 230
श्लेष्मकारवांश्च | 3 | संसेविता न | 229
श्लेष्मला स्वादु | 116 | संस्कारगुरु | 2
श्लेष्मको वात | 103 | ,, | 217
श्लेष्मातकफलं | 113 | संस्कृतं मथितं | 28
श्लेष्मात्मकः | 90 | संस्थाप्य शीतले | 49
श्वानविष्टी | 66 | संहितं धान्य | 123
श्वविद्गोधा | 208 | सकलमप्युदितानुदितं | 205
श्वासं निवारयति | 165 | सकलामयदर्शनं | 181
श्वासकासकफान् | 61 | सकल्कं श्वोदितं | 121
श्वासाङ्गमर्द | 164 | सकषायं स्वरारोग्य | 169
श्वासाङ्गमर्दहल्लास | 160 | सक्तवो लघवः | 24
| 115 | सक्तवो वातला | 201
श्वासापचार | 99 | सक्तवः शर्करा | 23
श्वानानशौ | 221 | सक्तवः शालि | 23
श्वावोर्ध्वकासा | 32 | सक्तूनामाश्रु | 217
श्वेतं दुकूलं | 229 | सक्तून् मांस | 212
,, | 229 | सक्षारं कटुकाम्लत्वात् | 149
श्वेतं सुकाचं | 173 | सक्षाराः सकषायाश्च | 156
श्वेतसूरणको | 61 | सक्षीरा बृंहणा | 24
श्वेताक्षिसी | 66 | स गर्गरो गर्गरनाद | 173
श्वेतवल्ली |

४०
श्लो० | पृष्ठ | श्लोक• | पृष्ठम्•
संग्राही दुर्जरो. | 89 | समिताया | • 44
संग्राही शीत • | 9• | समितायामूर्ध्वे | • 48
संग्राही शीतलः | 75 | समितायास्तृतीयांश | "
सङ्गतर्जति • | 142 | समिता वर्तिकाः | 30
स चाक्षारेण | | समिता बेसने | • 45
सच्छूर्णं निक्षिपेत् | • 51 | समिता शर्करा | 42
सेठी वतिकाञ्च | • 65 | समीराकिमि | 116
स तु प्रसवणश्चापि | 184 | समेन सर्पिषा | 121
सत्येन तेन | 218 | सम्यक् पाके | 48
सदा पथ्या | .141 | सरं कोशातकीजं | 154
सद्यो भुक्तवता | 228 | सरं प्लीहाश्र | 66
सद्योमांसं नवं | 21 | सरं वातहरं | 100
सद्यो रुचिकरं | 122 | सरस्स्वादुः | 143
सद्यः प्रियांलं | 209 | सरयूसलिलं | 182
सद्यः शुकविशुद्धिदं | 88 | सरस्वतीजलं | 181
सद्यः शुक्रकरं | 125 | सं रुच्यो मधुरो | 174
सन्तापं शमयन्ति | 184 | सगे विदाही | 15
सन्तोषमूर्च्छा | 79 | सर्पिः पलं | 140
सन्धानकारी | 7 | सर्पिः स्निग्धतर | 201
सपानसार्फाश्च | 213 | सर्पिर्माहिषं | 149
समानामपि | 101 | सर्पिरेव यव | 206
स भवति मतिपूर्णः | 190 | सर्पिषि प्रचुरे | 43
सभायां विदुषां | 219 | सर्वकुष्ठप्रशमनी | 12
स भोक्ता वासरे यः | 222 | सर्वग्रन्थिविनाशाय | 15
समभागां सितां | 48 | सर्वथा दोषजित् | 18
समया सितया | 50 | सर्वदा गुणकृत् | 1
समयोगेष्वपि | 202 | सर्वदोषहरं | 7
समवायिनि हेतौ | 25 | | 192
समस्थलकट्या | 193 | | 178
समान्निरपि | 132 | सर्वप्रयोगे | 100
समितां मर्दयेत् | 42 | सर्वरोगप्रशमनी | 142
समितां सर्पिषा | 34 | सर्वव्याधिहरं | 153
समितामोदका | 48 | " | 86
समिताभ्यां | " | सर्वानुपानानुवरं | 226
समिताया | 45 | सर्वामयघ्नं | 20

श्लोकाः पृष्ठम् श्लोकाः पृष्ठम्
सवाम कर १८२ सार्षपं, पत्र ६९
सर्वे श्लेष्मजाः १०६ सा शुद्धा ११८
सलिलं लघु १८१ सा शुष्का ११६
स लोक पर १४२ सा श्येनिका १४
सलक्तस्तिक्त ९८ साष्टरम्भाफलं १२१
सद्यश्चातक १९१ सित खण्डोऽति मधुरः १६३
सव्रीडाकर २२१ ,, १६४
सशर्करं दधि १३८ सिता गव्याज्य ३०
ससरं निर्जलं १४३ सिता च मधु १६२
ससोपाना भवेत् १८५ सितापाकेन ४६
सस्नेहं करमथितं १४५ सिता पृथुक १३४
सहकारफलं १११ सिताशीताम्बु १२२
,, १३४ सितासितोपलायुक्त १३०
सहकारभवं १५१ ,, १५५
सहनवनीतं १४४ सितोपला १६१
सा कस्तूरी ११८ ,, १६३
सा च श्वेता १४ सिद्धमांसरसो ५३
सात्म्यं चाशु बलं २०२ सिद्धयोग्यं २८
सात्म्यासात्म्य १९९ सिद्धां वा १९
साधारणं तु १८० सिद्धा पेषां २६
साधारणजलं सिद्धामन्यत्र १२८
साधारण्यन्मधु १६७ सिद्धार्थः १८
साप्येका खदिका ११८ सिद्धियोग्यं ५२
सामुद्रं त्वग्भिन्ने १७८ सिद्धे जलेन ५१
सामुद्रं लघु ११६ सिद्धैषा फेनिका ४४
सामुद्रो गुरु १७५ सिद्धैषा रोटिका ३५
सारसं पिशितं १७० सिद्धैषा लप्सिका ३४
सारसं सलिलं १८५ सिद्धोऽम्ल १०२
सारसस्य तथा १७२ सिन्दोळं ९१
सारांशुखो दीर्घ ५ सीताफलं १०३
साराम्लं ८६ सीतिवारस्तु ७१
सारिबा हरित ११० सुकोमले २२६
सार्धोक्तप्रमाणं २८ सुखं च मे २१८
सार्षपं १५२ सुखप्रयोग १०१

(५६)
श्लोकाः । पृष्ठम् । श्लोकाः । पृष्ठम्
। । सूपो विहम्मका । ३१
सुगन्धया शर्करया । ४४ । सूप्यमन्नं । ५५
सुगन्धशालिः । ४ । सूरणः कटुः । ६१
सुगन्धा कुण्ठरम्भा । ८९ । सूर्येन्दुपावनानां । १८९
सुगन्धि मेध्यं । ११५ । सूक्ष्मशालिस्तु । ४
सुगन्धिर्वात । ७३ । सृष्टपुरीषा । ८९
सुजातं दधि । १४१ । सृष्टमूत्र । ६
सुदत्तं शुल्फरुचे । १२० । ,, । २
सुधास्मचूर्णं । २२७ । सेवं समीर । १०२
सुधूतवस्त्रैरपि । २२५ । सेविका तर्पिणी । ३०
सुधौतः प्रस्रुतः । ५७ । सेहुण्डस्य दलं । ७६
सुधौतांस्तण्डुलान् । २६ । सेन्दी सिता । १६८
सुनिष्षण्णो हिमो । ७५ । सैन्धवं द्विविधं । ११६
सुपक्वं तत्तु मधुरं । ८४ । सैन्धवं लवणं । ,,
सुपक्वं रुचिकृत् । १०३ । सैन्धवत्रिकटु । २१०
सुपक्वास्तनवः । ५५ । सेवातिजीवक । ६७
सुपक्वास्स्वादु । १०३ । सोऽन्यश्च कटु । १६
सुप्तव्याघ्रादिव । २२२ । सोऽम्लो बस्ति । १४३
सुभृष्टशष्कलो । २५ । सौगन्धिकं क्वाथि । १२०
सुभृष्टैर्निस्तुषैः । ५७ । सौगन्ध्यं कुरुते । २२८
सुयुक्तांश्च । १४२ । सौमनस्यं बलं । २१६
सुरतजमतिखेदं । ५६ । सौम्यं रसायनं । १७७
सुवर्णमोचा । ८८ । सौवर्णे राजते । ,,
सुशीतो बातलो । ७९ । सौवीरं तु । १२४
सुषेणदेवेन । १४२ । ,, । ,,
सुषेणोक्तः कथ्यते । २२१ । सौवीरं कटु । २०४
सुस्निग्धं छागलं । १४४ । स्तन्यश्च गर्भस्थिर । ४
सुस्निग्धमृत्तिकोपेतं । २१ । स्तम्भमवस्थितः । १२०
सुस्वादु तिक्त । १६९ । स्त्रियां कटु । १९
सुस्विन्नपिष्टं । ५२ । स्त्रीकेशांशु । २०८
सूक्ष्ममुक्तमपि । २११ । स्त्रीणां भूषण । १२९
सूक्ष्मं कफघ्नं । १२५ । स्त्रीषु हर्षं । ४४
सूक्ष्मं हरितकं । ११० । स्थलजाः स्वाद्ववः । ३
सूक्ष्मपत्रा तु । ६८ । स्थापितं हेमने पात्रे । १७६
सूक्ष्मशालिस्तु । ४ । स्नात्वा । ४०

49
• श्लोक• पृष्ठम्• श्लोक• : पृष्ठम् :
बाल्यां घृते वा 40 | स्नेहयुक्तं च 193
स्थूलस्थूविरे 202. | स्नेहसिद्धं • 75
स्थूलाः स्युर्वर्तुलाश्च 46 | स्नेहस्पर्शप्रभा 196
स्थूलाजदुग्धं 132 | स्नेहाजीर्णे 209
स्थूना ततः • 118 | स्नेहेन तीक्ष्णं "
स्थौल्यं करोति 144 | स्पृष्टे तु कण्डू 197
स्थौल्यं वृष्यं 85 | स्पृहयति वारि 280
स्थौल्यकान्तिकरं 108 | स्मृत्योर्जोजक 53
स्थौल्याश्मरी 12 | स्यातामुभौ 71
स्नानं विधाय 222 | स्यात् काष्ठ 88
स्नानं सशर्करं 221 | स्याच्चेतकी 101
स्निग्धं च जन्तु 94 | स्यादा मदोष • 95
स्निग्धं धैर्यकरं 133 | स्याद्धातकीरस 168
स्निग्धं निद्राकरं 170 | स्याद्याबनाळ 160
स्निग्धं पक्वं तु 100 | स्यान्निर्जलं शृतं 130
स्निग्धं मधुरशीतं च •136 | स्युः कर्मणे 204
स्निग्धं सरं 97 | संसनं सत्ययो 202
स्निग्धं सुगन्धं 110 | स्रोतः शुद्धि 143
स्निग्धं स्वादुतरं 80 | स्रोतो मार्दव 57
स्निग्धत्वात् 131 | स्वच्छं भृङ्गाभ्र 120
स्निग्धश्च सन्तर्पण 156 | स्वभावतश्च 38
स्निग्धातिगुरवो 172 | " 217
स्निग्धादयो 187 | स्वरक्षये वापि 227
स्निग्धा पथ्या 164 | स्वर्णजीवन्तिका 70
स्निग्धा पुण्ड्रक 160 | स्वल्पत्वक् 100
" 164 | स्वल्पमूत्रा 23
स्निग्धा श्लेष्मकरी 34 | स्वादुः कषायः 16
स्निग्धो ग्राही 6 | स्वादुः सुशीतो 228
स्निग्धोऽन्यो 7 | स्वादु स्यात् 135
स्निग्धोमा स्वादु 18 | स्वादु कट्वम्ल 101
स्निग्धो वर्णबला 17 | स्वादुपारकरसं 85
स्निग्धो वृष्यो 92 | " 126
स्नेहगौरव 163 | " 181
स्नेहभूयिष्ठ 87 | स्वादुपारकरखाः

श्लोकाः पृष्ठम् | श्लोकाः पृष्ठम्
स्वादुपाककफापहा १८० | हरितं चाथ ३०
स्वादुर्णकानिक ११६ | हरितं मूलकादभृतं १०८
स्वादुपाकरसं ९९ | हरिद्रा कटु ६५
स्वादु बिम्बीफलं ७४ | हरिद्रामार्द्रकी ५२
स्वादुरम्लविपाको ६ | हरेणुकविना १९९
स्वादु वृष्यं १४४ | हरिन्मुद्गः १०
स्वादु शुद्धोदकं २१ | हरीतकीं परं ११०
स्वादु सञ्जयति २१६ | हरीतकीति १०१
स्वादूष्णा गुरवः ६ | हरीतकी तु ”
स्वाद्वम्लं विशदं ११० | हविर्ह्यस्तन १५१
स्वाद्वम्लं सान्द्र १३५ | हस्तलाञ्जनयः ३३
स्वाद्वम्लभावात् १०१ | हस्तिकन्दः ६८
स्वाद्वम्लस्य गुणाः १३५ | हस्तिकोशातकं ८०
स्विन्नं दोषत्रयं ९१ | हस्तिनीदधि १३८
स्विन्नाः पित्तकफौ १३ | हस्तिनीनवनीतं १४८
स्विन्नभक्ष्याश्च ५५ | हस्तिन्या मधुरं १३३
स्विन्नास्तु हरष २५ | हस्तेन चूर्णयेत् ४१
स्वेदयेतप्तके ३४ | हारीतं पललं १७१
स्वेदवेपथु १९६ | हारातमांस १९९
स्वेदैर्वाति २०३ | हिक्का गुडाङ्कुर १६७
हंसः प्रसन्नकृति १९७ | हिक्काध्मानादि १९१
हन्ति गुल्मं ११३ | हिक्काऽरुच्यस्त्र ११२
हन्ति गुल्ममतीसार १४४ | हिङ्गु वात ११५
हन्ति गुल्मार्शः ११५ | हितं परिमितं २२३
हन्ति चक्षुर्गमं ८२ | हितमिच्छन्ति १५४
हन्ति वातं ४५ | हिताहितत्वे २००
हन्ति शोषं पित्त १११ | हिध्माकफातिसारघ्नं १०७
हन्ति सर्वकफवान् ११० | हिध्मानाहानिलश्वास ९६
ह्रस्वक्रपित ६५ | हिमं तु शीतलं ७९
हन्यात् परमदुष्टार्यं २१५ | हिमकुन्दशशिप्रभं ४६
हन्याद्वातं ११ | हिमजा शर्करा ६२
हरति पवनरक्तं ८७ | हिमप्रविद्धकरादिभ्यो ७९
हरति विषमं १०१ | हिमवत्सूनवेऽमृताः ८८
हरिणो वातं ५६ | हिमारिवाचाथ १०२

५१
श्लोकाः पृष्ठम्. 'श्लोकाः पृष्ठम्.'
हिमाम्बु शीतं १७९ क्षारोऽम्लरससंयोगे - २००
हीनमात्रं तनोः २१७ क्षारोष्णकटुकं २१६
हीनातिमात्रं २०० क्षितिगोमयकाष्ठेषु १०७
हीनातिरिक्ता १९६ क्षिप्ताप्सु निमज्जति १०१
हीयते गुग्भवर्णीयैः ०,, क्षीरं कासश्वास १२९
हृद्यं कटु रसे पाके ८६ क्षीरं गवाजकादेः ,,
हृद्यं कषायामसंज्ञं १०२ क्षीरं गव्यं १३४
हृद्यं गुरुत्वसं १७७ क्षीरं न भुञ्जीत १२९
हृद्यं तिक्तं ११२ क्षीरं पुनर्नवाया १२२
हृद्यं मन्दाग्नि ५७ क्षीरं भक्तोत्तरं १३०
हृद्यं रुचिकरं ९८ क्षीरं मुहूर्ते १२८
हृद्योऽतिदुर्जरः ९७ क्षीरं सशर्करं ,,
हृद्रोगजीर्णज्वर ६१ क्षीरं साक्षात् १३०
हृद्रोगेषु हितं ९१ क्षीरावशेषः १२८
हृष्यन्मयूरः १९७ क्षीरिका दुर्जरा ८०
हेमन्ते पादहीनं च १९२ क्षीरिकायाः फलं ९७
हेमन्ते शिशिरे १३६ क्षीरे कटाहे ५६
हेमपात्रे च १९५ क्षीरेण सह १३४
हेयन्त्रवीनं १५१ क्षीरे विवृद्धानि १३५
होल्कोऽप्यानिलो २४ क्षीरे समांशं १२८
ह्रदकुल्या १७५ क्षीरोद्भवं तु १४७
ह्रावं तु वह्निजननं १८६ क्षीरोष्णे- २०९
क्षतक्षयहरा १६४ क्षुत्तृष्णाग्लानि ५७
क्षतक्षीणहितं २६ क्षुद्रं रम्भाफलं ८८
क्षताक्षपित्तो २० ७२
क्षतदाहज्वरान् ७० क्षुदजन्त्वभिदुष्टस्य १९०
क्षयोपवास ८८ क्षुद्राम्रं बलिं ११२
क्षतः कषायमधुरः ११ क्षुधासंशुष्क १९२
क्षारश्च किंचित् ५६ क्षुपोपोटक ६७
क्षाराः प्राच्येषु ०१ क्षेत्रजा लवणा ६९
क्षारम्बुमत्स्या ७५ क्षौद्रं तु कपिलाभासं १६६
क्षारोदकं महातरोः ०५ क्षौद्रं
क्षारोदकवमुत्पन्नं २१

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APPENDIX II.
भोजनकुतूहले प्रथमपरिच्छेदे स्मृतानां
ग्रन्थानां सूची ।
पृष्ठम्
क्रियांसारः २८.
जनार्दनमहोदयः ५८.
धन्वन्तरियनिघण्टुः ७६.
पारिजातः ७, १४, १६, ३१, ७४.
भावप्रकाशः ८, ५८.
राजनिघण्टुः १, ३, ४, ५, ७, ८,
९—१५, १७—२३, ५१,
१३३, १५५, १५६.
विष्णुपुराणम् २२६, २२७.
हृदयदीपः २९, ५२, ५७.

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