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सर्वकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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द्वितीयो भागः विषय-सूची ४३
वत्सनाभ विष के लक्षण १००० । ऋतुभेद से विरेचन द्रव्यों में भेद १०१३
विष शोधने की विधि १००० । अभयादिमोदक १०१४
विष के गुण १००० । विरेचन लेने के बाद कर्तव्य १०१४
उपविषों का निरूपण १००१ । न्यूनाधिक विरेचन का लक्षण और औषध १०१५
द्रव्यों के पूर्ण गुणयुक्त रहने की अवधि १००१ । अनुवासन तथा निरूह के भेद १०१६
घी तथा तैल के विषय में विशेषता १००१ । स्नेहबस्ति की विधि १०१६
स्नेहपानविधिप्रकरणम् । सभी प्रकार के विकारों को दूर करने वाली
स्नेह के भेद तथा विशेष नाम १००२ । अनुवासन बस्ति १०२१
घी तथा तेल पिलाने योग्य व्यक्ति १००४ । निरूहबस्ति की विधि १०२२
मज्जा तथा घी पिलाने योग्य व्यक्ति १००४ । उत्क्लेशन बस्ति १०२४
शीतादि समयों तथा वातादि दोषों के भेद १००५ । दोषहर बस्ति १०२४
नस्य आदि लेने में तेल तथा घृत का प्रयोग १००५ । शमन बस्ति १०२४
घी आदि के पीने में अनुपान १००५ । लेखन बस्ति १०२४
स्नेह से द्वेष रखने वालों के लिये स्नेह-पान-विधि १००५ । बृंहणबस्ति १०२५
स्नेहन करने वाले अन्य भी पदार्थ १००५ । पिच्छिलबस्ति १०२५
स्नेह के न पचने पर कर्तव्य १००५ । निरूह बस्ति की मात्रा १०२५
स्नेह न पचने की आशङ्का में कर्तव्य १००६ । मधुतैलकबस्ति १०२५
स्नेह पीने से उत्पन्न प्यास की शान्ति १००६ । यापनबस्ति १०२६
स्नेह पीने के अयोग्य लोग १००६ । युक्तरथबस्ति १०२६
स्नेहपान के योग्य लोग १००६ । उत्तरबस्ति १०२७
स्नेहपान द्वारा भली भाँति स्निग्ध हुए लोगों । फलवर्ति की विधि १०२७
के लक्षण १००६ । नस्यग्रहण की विधि १०२८
अधिक मात्रा में स्निग्ध हुए लोंगों के लक्षण १००७ । रेचन नस्य की मात्रा १०२८
रूक्ष तथा अत्यन्त स्निग्ध हुए लोगों के । रेचन नस्य की विधि १०२९
लिये कर्तव्य १००७ । नस्य औषध का प्रमाण १०२९
स्नेह सेवन करने के गुण १००७ । रेचन नस्य के भेद १०२९
स्नेह सेवन करने के समय त्याज्य कर्म १००७ । रेचन नस्य के भेदों के लक्षण १०२९
पञ्चकर्मविधिप्रकरणम् । रेचन तथा स्नेहन नस्य के उपयोग १०२९
। रेचन औषधियों के गुण १०३०
पञ्चकर्म के नाम १००७ । प्रधमन नस्य की औषधियाँ १०३०
वमन कर्म में प्रथम वमन के योग्य समय और । स्नेहननस्य की कल्पना १०३०
रोगियों का निर्देश १००८ । बृंहण नस्य की विधि १०३१
वमन कराने के अयोग्य लोगों का निर्देश १००८ । प्रतिमर्श की मात्रा १०३२
वमन कराने की विधि १००९ । प्रतिमर्श का समय १०३२
विरेचन के योग्य समय तथा व्यक्ति का निर्देश १०११ । प्रतिमर्श के विषय तथा गुण १०३२
मृदु, मध्यम तथा क्रूर कोष्ठ वाले मनुष्यों तथा । प्रतिमर्श के विषय तथा गुण १०३२
उनके योग्य मात्रा एवं द्रव्यों का वर्णन १०१२ । नस्य की सामान्य विधि १०३३
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